राजकोट/नई दिल्ली:


पिच पर धैर्य की पराकाष्ठा और साहस की प्रतिमूर्ति: टीम इंडिया की उस 'दीवार' को सलाम जिसने चोट सहकर भी जीत की राह बनाई

भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे जुझारू और तकनीक के धनी बल्लेबाजों में शुमार, चेतेश्वर पुजारा आज अपना 38वां जन्मदिन मना रहे हैं। पिछले वर्ष अगस्त में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह चुके पुजारा के लिए यह जन्मदिन विशेष है, क्योंकि क्रिकेट जगत और उनके करोड़ों प्रशंसक सोशल मीडिया पर उनके शानदार करियर की उन यादों को ताजा कर रहे हैं, जिन्होंने भारत को विदेशी धरती पर जीतना सिखाया। 'मॉडर्न डे वॉल' कहे जाने वाले पुजारा का बल्ला भले ही अब अंतरराष्ट्रीय मैदानों पर खामोश हो, लेकिन उनकी विरासत आज भी युवा क्रिकेटरों के लिए एक मार्गदर्शिका बनी हुई है।

आंकड़ों में पुजारा का साम्राज्य: 103 टेस्ट और अविस्मरणीय पारियां

चेतेश्वर पुजारा का टेस्ट करियर केवल रनों का अंबार नहीं, बल्कि क्रीज पर बिताए गए घंटों और धैर्य की कहानी है। उनके करियर के कुछ महत्वपूर्ण पड़ाव इस प्रकार हैं:

  • टेस्ट का लंबा सफर: पुजारा ने भारत के लिए कुल 103 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने 43.60 की औसत से 7,195 रन बनाए।
  • शतकों का कीर्तिमान: उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में 19 शानदार शतक और 35 अर्धशतक दर्ज हैं।
  • बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के नायक: 2018-19 की ऐतिहासिक सीरीज में पुजारा ने 521 रन बनाकर 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' का खिताब जीता था, जो ऑस्ट्रेलिया में भारत की पहली टेस्ट सीरीज जीत का आधार बना।
  • गाबा का वो शौर्य: 2021 में ब्रिसबेन (गाबा) के मैदान पर शरीर पर लगी अनगिनत गेंदों और नीले पड़े निशानों के बावजूद उन्होंने जिस तरह बल्लेबाजी की, उसने ऐतिहासिक जीत की नींव रखी।

सोशल मीडिया पर उमड़ा प्यार: "पुजी भाई की बैटिंग खत्म ही नहीं होती"

पुजारा के जन्मदिन पर केवल प्रशंसक ही नहीं, बल्कि आईपीएल की प्रमुख फ्रेंचाइजी जैसे RCB, CSK और राजस्थान रॉयल्स ने भी उन्हें विशेष सम्मान दिया है। प्रशंसकों ने उनके करियर के उन पलों को साझा किया जब वे घंटों तक गेंदबाजों को थकाते रहते थे।

  • प्रशंसकों की टिप्पणी: सोशल मीडिया पर एक प्रशंसक की यह टिप्पणी वायरल हो रही है— "पुजी भाई की बैटिंग खत्म ही नहीं होती", जो उनकी मैराथन पारियों की ओर इशारा करती है।
  • दिग्गजों की राय: कई पूर्व क्रिकेटरों ने पुजारा को पारंपरिक टेस्ट बल्लेबाजी का अंतिम सच्चा रक्षक बताया है, जिसने टी20 के दौर में भी क्लासिकल तकनीक को जिंदा रखा।

भारतीय टेस्ट क्रिकेट का एक स्वर्णिम अध्याय

चेतेश्वर पुजारा का 38वां जन्मदिन इस बात का प्रमाण है कि क्रिकेट केवल चौकों और छक्कों का खेल नहीं है; यह संयम, संघर्ष और टीम के प्रति समर्पण का भी नाम है। पुजारा ने दिखाया कि कैसे एक शांत स्वभाव का खिलाड़ी मैदान पर सबसे बड़ा योद्धा बन सकता है। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब भी सबसे मजबूत तकनीकी बल्लेबाजों की बात होगी, चेतेश्वर पुजारा का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिया जाएगा।

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