भारतीय क्रिकेट में जब भी नई गेंद से सटीक लाइन-लेंथ और दोनों तरफ स्विंग कराने की बात होती है, तो Bhuvneshwar Kumar Singh का नाम सबसे पहले लिया जाता है। हाल के वर्षों में Royal Challengers Bangalore के साथ उनके अनुभव और नियंत्रण ने उन्हें फिर सुर्खियों में ला खड़ा किया, खासकर 2025 में खिताब जीतने के अभियान में उनकी अहम भूमिका ने यह साबित किया कि उम्र और चोटों के बावजूद उनकी कला अब भी उतनी ही प्रभावी है। 3/33 और फाइनल में 2/38 जैसे आंकड़े उनके बड़े मैचों में प्रभाव को दर्शाते हैं, जहां उन्होंने दबाव में भी सटीक गेंदबाज़ी का प्रदर्शन किया।

इस चमकदार वर्तमान के पीछे एक लंबा और संघर्षपूर्ण सफर छिपा है जिसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के मेरठ से हुई। 5 फरवरी 1990 को जन्मे भुवनेश्वर को क्रिकेट की दुनिया में कदम रखने के लिए उनकी बहन ने प्रेरित किया, जिन्होंने उन्हें 13 साल की उम्र में कोचिंग सेंटर तक पहुंचाया। घरेलू क्रिकेट में उत्तर प्रदेश के लिए खेलते हुए उन्होंने कम उम्र में ही अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी और 17 वर्ष की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। 2008/09 रणजी ट्रॉफी फाइनल में Sachin Tendulkar को शून्य पर आउट कर उन्होंने इतिहास रच दिया, जो उनके करियर का पहला बड़ा मोड़ साबित हुआ।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका आगाज़ 2012 में पाकिस्तान के खिलाफ टी20 मैच से हुआ, जहां उन्होंने अपने पहले ही ओवर में विकेट लेकर प्रभाव छोड़ा। इसके बाद वनडे में भी उन्होंने पहली ही गेंद पर विकेट हासिल कर अपनी खासियत साबित की। टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों प्रारूपों में पांच विकेट लेने वाले वह पहले भारतीय गेंदबाज़ बने और यह उपलब्धि उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती है। 2013 में ICC Champions Trophy 2013 जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा बनकर उन्होंने वैश्विक मंच पर खुद को स्थापित किया और उसी वर्ष श्रीलंका के खिलाफ 4/8 का करियर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए प्लेयर ऑफ द सीरीज भी बने।

इंग्लैंड दौरे 2014 में लॉर्ड्स टेस्ट में 6/82 का शानदार प्रदर्शन और नॉटिंघम में पांच विकेट ने उन्हें टेस्ट क्रिकेट में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उस सीरीज में उन्होंने 19 विकेट लेने के साथ 247 रन भी बनाए, जिससे उनकी ऑलराउंड क्षमता भी सामने आई। हालांकि, इसके बाद बढ़ते वर्कलोड और चोटों ने उनके करियर की रफ्तार को प्रभावित किया, जिससे वह टीम से बाहर भी हुए और अपनी स्विंग की धार खोते नजर आए।

आईपीएल में उनका सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन Sunrisers Hyderabad के साथ जुड़ने के बाद उन्होंने खुद को फिर से स्थापित किया। 2016 और 2017 में लगातार दो बार पर्पल कैप जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया और 2016 में टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। डेथ ओवरों में यॉर्कर डालने की उनकी क्षमता ने उन्हें एक संपूर्ण गेंदबाज़ बना दिया। हालांकि, बार-बार की चोटों ने उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को सीमित कर दिया और 2022 के बाद वह टीम से बाहर हो गए।

इसके बावजूद अनुभव और कौशल ने उन्हें क्रिकेट में प्रासंगिक बनाए रखा। 2025 में बेंगलुरु के साथ उनकी वापसी ने यह दिखाया कि वह अब भी मैच विनर साबित हो सकते हैं। अपने करियर में उन्होंने हर प्रारूप में प्रभावशाली प्रदर्शन किया, एशिया कप 2022 में 11 विकेट लेकर सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बने और मार्च 2021 में आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ का खिताब भी जीता। भुवनेश्वर कुमार की कहानी केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि धैर्य, संघर्ष और निरंतर वापसी की कहानी है, जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट का एक विशिष्ट नाम बना दिया।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story