ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेट टीम की रीढ़ मानी जाने वाली बेथनी लुईस मूनी आज विश्व क्रिकेट में निरंतरता, संयम और बड़े मंच पर प्रदर्शन की मिसाल बन चुकी हैं। तीनों फॉर्मेट में बल्लेबाज़ के रूप में उनकी भूमिका जितनी अहम है, उतनी ही प्रभावशाली उनकी उपलब्धियाँ भी हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दुनिया की नंबर-1 बल्लेबाज़ बनने से लेकर विश्व कप और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े टूर्नामेंटों में मैच जिताऊ पारियाँ खेलने तक, मूनी ने खुद को आधुनिक युग की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में स्थापित किया है।

14 जनवरी 1994 को विक्टोरिया के शेपार्टन में जन्मी मूनी का क्रिकेट सफर किसी परंपरागत योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक संयोग से शुरू हुआ। बचपन में फुटबॉल, टेनिस और ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल जैसे कई खेल खेलने वाली मूनी को पहली बार अपने भाई की टीम में खेलने का मौका मिला और यहीं से उनका क्रिकेट करियर आकार लेने लगा। बाद में क्वींसलैंड के हर्वे बे में बसने के बाद उन्होंने विकेटकीपिंग की ओर रुख किया और सीमित संसाधनों के बावजूद लड़कों की टीम में खेलते हुए अपनी तकनीक को निखारा। किशोरावस्था में ही उन्हें ऑस्ट्रेलिया के लिए भविष्य का खिलाड़ी माना जाने लगा था, जो उनकी प्रतिभा का स्पष्ट संकेत था।

घरेलू क्रिकेट में मूनी ने बेहद कम उम्र में पहचान बना ली थी। 16 साल की उम्र में क्वींसलैंड फायर के लिए डेब्यू करने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। महिला बिग बैश लीग में पर्थ स्कॉर्चर्स के लिए खेलते हुए उन्होंने 3000 रन पूरे कर इतिहास रचा और 2019 के फाइनल में 65 रन की साहसी पारी खेलकर टीम को खिताब दिलाया। भारत की महिला प्रीमियर लीग में गुजरात जायंट्स के लिए कप्तान के रूप में उनकी भूमिका ने उन्हें वैश्विक फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट का भी अहम चेहरा बना दिया, जहाँ उन्होंने लगातार रन बनाकर टीम की रीढ़ की भूमिका निभाई।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मूनी का सफर 2016 में शुरू हुआ, लेकिन असली पहचान उन्हें 2020 के टी20 विश्व कप में मिली, जब उन्होंने 259 रन बनाकर टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब जीता और फाइनल में नाबाद 78 रन की पारी खेलकर ऑस्ट्रेलिया को चैंपियन बनाया। 2022 के वनडे विश्व कप में भी उन्होंने 330 रन बनाकर टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई, जबकि उसी वर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स में उनकी 61 रन की पारी ने स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया। 2022 में उन्होंने 918 अंतरराष्ट्रीय रन बनाकर क्रिकेट जगत को अपनी निरंतरता का लोहा मनवाया।

मूनी की सबसे बड़ी खासियत बड़े मैचों में दबाव झेलने की क्षमता है। 2025 में उन्होंने टेस्ट, वनडे और टी20—तीनों फॉर्मेट में शतक लगाने वाली पहली ऑस्ट्रेलियाई महिला बनकर इतिहास रच दिया। उनके नाम वनडे में 5 और टी20 में 2 शतक हैं, जबकि टेस्ट में भी उन्होंने शतकीय पारी खेलकर खुद को पूर्ण बल्लेबाज़ साबित किया। उनकी पारियों में तकनीकी मजबूती के साथ-साथ मैच की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की अद्भुत क्षमता दिखाई देती है।

मैदान के बाहर शांत और लो-प्रोफाइल रहने वाली मूनी को ‘अंडर द रडार’ खिलाड़ी कहा जाता है, लेकिन उनकी उपलब्धियाँ उन्हें क्रिकेट की सबसे बड़ी हस्तियों में शामिल करती हैं। दो बार ‘विजडन लीडिंग वुमन क्रिकेटर ऑफ द वर्ल्ड’ और ‘बेलिंडा क्लार्क अवॉर्ड’ जीतने वाली मूनी आज उस मुकाम पर हैं, जहाँ उनका नाम विश्व क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में लिया जाता है। यह सफर साबित करता है कि प्रतिभा के साथ निरंतर मेहनत और सही अवसर मिलने पर कोई भी खिलाड़ी शिखर तक पहुँच सकता है।

Pratahkal Bureau

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