102 डिग्री बुखार में भी नहीं डिगा हौसला, अरुंधति चौधरी ने भारत के लिए जीता कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का गोल्ड|
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 70 किग्रा वर्ग के फाइनल में अरुंधति चौधरी ने इंग्लैंड की चैंटेल रीड को 5-0 से हराया। मैच के बाद उनकी बहन ने बताया कि वह 102 डिग्री बुखार के बावजूद रिंग में उतरी थीं।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 70 किग्रा वर्ग का गोल्ड जीतने वाली भारतीय मुक्केबाज अरुंधति चौधरी|
नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में कई पदक डाले। बॉक्सिंग प्रतियोगिता के अंतिम दिन भारत ने सात स्वर्ण सहित कुल 10 पदक जीतकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। इन स्वर्ण पदकों में सबसे चर्चित जीत 70 किलोग्राम वर्ग में राजस्थान की अरुंधति चौधरी की रही। अरुंधति ने फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड की चैंटेल रीड को एकतरफा अंदाज में 5-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। मुकाबले के बाद सामने आई जानकारी ने उनकी इस उपलब्धि को और भी खास बना दिया। उनकी बड़ी बहन चारू ने बताया कि अरुंधति 102 डिग्री बुखार से जूझ रही थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने रिंग में उतरकर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत लिया।
फाइनल मुकाबले में अरुंधति चौधरी ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया। पहले राउंड में पांच में से चार जजों ने उन्हें 10-10 अंक दिए। दूसरे राउंड में उन्होंने अपने प्रदर्शन को और बेहतर किया तथा सभी जजों से पूरे अंक हासिल किए। तीसरे और अंतिम राउंड में भी सभी जजों ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद उन्होंने 5-0 के सर्वसम्मत निर्णय से मुकाबला जीत लिया।
मुकाबले के बाद अरुंधति की बड़ी बहन चारू ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में बताया कि अरुंधति को 102 डिग्री बुखार था। उन्होंने कहा कि परिवार इस जीत से बेहद खुश है और उन्हें अपनी बहन पर गर्व है कि उन्होंने बीमारी के बावजूद देश के लिए स्वर्ण पदक जीता। चारू के इस खुलासे के बाद अरुंधति के संघर्ष और समर्पण की चर्चा व्यापक स्तर पर होने लगी।
भारत को बॉक्सिंग में मिले सात स्वर्ण पदकों में छह मुक्केबाज हरियाणा से थे, जबकि अरुंधति चौधरी राजस्थान के कोटा शहर से हैं। कोटा देशभर में शिक्षा के केंद्र के रूप में जाना जाता है, लेकिन जब अरुंधति ने बॉक्सिंग में करियर बनाने का फैसला किया था, तब शहर में उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए कोई बॉक्सिंग कोच उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य की दिशा में लगातार मेहनत जारी रखी।
23 वर्षीय अरुंधति ने बॉक्सिंग शुरू करने से पहले बास्केटबॉल खेला था। 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने मुक्केबाजी को अपना खेल चुना और इसके बाद लगातार अभ्यास करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया। उनकी यह उपलब्धि उन खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा मानी जा रही है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं।
अरुंधति के पिता सुरेश चौधरी चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़ाई पर ध्यान दे। उन्होंने स्पोर्ट्सस्टार को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि अरुंधति पढ़ाई में भी बेहद प्रतिभाशाली थीं और विशेष रूप से गणित में उनकी अच्छी पकड़ थी। उन्होंने बेटी को आईआईटी या सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने की सलाह दी थी। उनका मानना था कि वह अपनी शैक्षणिक क्षमता के दम पर इन परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकती हैं।
सुरेश चौधरी ने बताया कि जब उन्होंने अरुंधति से आईएएस और आईआईटी की बात की, तो अरुंधति ने उनसे पूछा कि कितने लोग इन परीक्षाओं में सफल होते हैं। इसके बाद उन्होंने अपने पिता से यह भी पूछा कि अब तक कितने भारतीय खिलाड़ियों ने ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता है। उस समय पिता ने उन्हें अभिनव बिंद्रा का उदाहरण दिया। इस पर अरुंधति ने कहा था कि वह ऐसी पहली भारतीय महिला बनना चाहती हैं, जो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करे।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर अरुंधति चौधरी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 102 डिग्री बुखार के बावजूद फाइनल मुकाबले में उतरकर गोल्ड जीतने का उनका प्रदर्शन भारतीय बॉक्सिंग के लिए एक यादगार पल बन गया है और यह उनकी मेहनत, अनुशासन तथा खेल के प्रति समर्पण को भी दर्शाता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
