भारतीय क्रिकेट में तेज़ी से उभरते नाम अंशुल कंबोज ने बहुत कम समय में अपनी पहचान एक प्रभावशाली ऑलराउंडर के रूप में बना ली है। दाएं हाथ के मध्यम गति के गेंदबाज़ और उपयोगी बल्लेबाज़ के तौर पर उन्होंने न सिर्फ घरेलू क्रिकेट में बल्कि आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। 2025 में एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी 2025 के चौथे टेस्ट में इंग्लैंड क्रिकेट टीम के खिलाफ ओल्ड ट्रैफर्ड में टेस्ट डेब्यू करते हुए उन्होंने अपने करियर का एक नया अध्याय शुरू किया और इसी मैच में बेन डकेट का विकेट लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहली सफलता भी हासिल की।

हरियाणा से आने वाले कंबोज का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। 17 फरवरी 2022 को रणजी ट्रॉफी में पदार्पण करते हुए उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा। इसके बाद अक्टूबर 2022 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में टी20 और नवंबर 2022 में विजय हजारे ट्रॉफी में लिस्ट ए डेब्यू किया। शुरुआती दौर में ही सीमित ओवरों के क्रिकेट में उन्होंने अपनी गेंदबाज़ी से प्रभाव छोड़ा, जहां सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में 7 मैचों में 7 विकेट और विजय हजारे ट्रॉफी 2023–24 में 10 मैचों में 17 विकेट लेकर हरियाणा को खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई।

उनके शानदार प्रदर्शन ने जल्द ही चयनकर्ताओं और फ्रेंचाइज़ियों का ध्यान खींचा। 2024 आईपीएल सीजन में मुंबई इंडियंस के साथ उन्होंने अपने आईपीएल करियर की शुरुआत की, जहां उनके प्रदर्शन ने उन्हें बड़े मंच पर पहचान दिलाई। इसके बाद 2025 के मेगा ऑक्शन में चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें 3.4 करोड़ रुपये में खरीदकर उनकी प्रतिभा पर भरोसा जताया। इसी दौरान वे एसीसी इमर्जिंग टीम्स एशिया कप 2024 में इंडिया ए टीम का हिस्सा भी बने, जो उनके लगातार बढ़ते कद का प्रमाण था।

घरेलू क्रिकेट में कंबोज की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक नवंबर 2024 में आया, जब उन्होंने रणजी ट्रॉफी में केरल के खिलाफ एक ही पारी में सभी 10 विकेट लेकर इतिहास रच दिया। इस दुर्लभ उपलब्धि ने उन्हें उन चुनिंदा गेंदबाज़ों की सूची में शामिल कर दिया जिन्होंने यह कारनामा किया है। इसके अलावा दलीप ट्रॉफी 2024–25 में इंडिया सी का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने सिर्फ 3 मैचों में 16 विकेट लेकर 17.12 की औसत से ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ का खिताब अपने नाम किया, जिसने उन्हें राष्ट्रीय चयन के दरवाजे तक पहुंचा दिया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका चयन भी परिस्थितियों का परिणाम था, लेकिन मौके को भुनाने की कला ने उन्हें अलग बनाया। 2025 में भारतीय टीम में चोटिल खिलाड़ियों की जगह शामिल किए जाने के बाद उन्होंने अपने पहले ही टेस्ट में प्रभावशाली शुरुआत की। यह सफर दिखाता है कि कैसे निरंतर प्रदर्शन, घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्डतोड़ उपलब्धियां और बड़े मंच पर खुद को साबित करने की क्षमता किसी खिलाड़ी को स्टार बना सकती है।

आज अंशुल कंबोज भारतीय क्रिकेट के उन उभरते सितारों में शामिल हैं जिनसे भविष्य में बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं। उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा के साथ मेहनत और सही मौके मिलने पर कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।

Pratahkal Newsroom

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