तालिबान के प्रतिबंध के बाद ऑस्ट्रेलिया में शरण लेने वाली अफगान महिला क्रिकेटर ईसीबी और एमसीसी के सहयोग से टी20 मैच और ट्रेनिंग सत्र में भाग लेंगी।

अफगानिस्तान में तालिबान शासन के बाद महिला क्रिकेट पर लगे प्रतिबंध के बीच अब अफगानिस्तान की रिफ्यूजी महिला क्रिकेट टीम अंतरराष्ट्रीय मंच पर वापसी करने जा रही है। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने अफगानिस्तान की रिफ्यूजी महिला टीम को इंग्लैंड दौरे के लिए आमंत्रित किया है, जहां टीम टी20 मुकाबले खेलेगी, हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग सत्र में हिस्सा लेगी और 5 जुलाई को लॉर्ड्स में होने वाले आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल का लाइव अनुभव भी करेगी।

यह दौरा मेरीलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC) और एमसीसी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। टीम में शामिल खिलाड़ी वे पूर्व अफगान महिला क्रिकेटर हैं, जिन्हें अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद अपना देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। तालिबान शासन लागू होने के बाद अफगानिस्तान में महिलाओं को खेल और सार्वजनिक जीवन से लगभग पूरी तरह बाहर कर दिया गया था। इसके बाद कई महिला क्रिकेटरों ने ऑस्ट्रेलिया में शरण ली और वहीं क्रिकेट खेलना जारी रखा।

इन खिलाड़ियों ने जनवरी 2025 में ऑस्ट्रेलिया में ‘क्रिकेट विदाउट बॉर्डर्स XI’ के खिलाफ मुकाबला भी खेला था। अब इंग्लैंड दौरा उनके क्रिकेट करियर को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

ECB ने स्पष्ट किया है कि यह दौरा केवल क्रिकेट मैचों तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल में समावेशिता और अवसर की भावना को मजबूत करने का प्रयास भी है। ECB की डिप्टी CEO और इंग्लैंड महिला टीम की मैनेजिंग डायरेक्टर क्लेयर कॉनर ने कहा कि 2021 में अफगानिस्तान छोड़ने के बाद इन खिलाड़ियों ने बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद क्रिकेट नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का साहस और समर्पण प्रेरणादायक है तथा ‘इट्स गेम ऑन’ संस्था के साथ मिलकर उनके लिए विशेष कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। क्लेयर कॉनर ने कहा कि खिलाड़ियों को महिला टी20 विश्व कप 2026 का फाइनल देखने का अवसर मिलना भी महत्वपूर्ण है और क्रिकेट को समावेश तथा अवसर का माध्यम बनना चाहिए।

‘इट्स गेम ऑन’ संस्था ने इन खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया पहुंचाने और उनके पुनर्वास में अहम भूमिका निभाई थी। संस्था की सह-संस्थापक और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर Mel Jones ने कहा कि यह दौरा बड़ा कदम जरूर है, लेकिन इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने सब कुछ खोने के बावजूद क्रिकेट के प्रति जो समर्पण और साहस दिखाया है, वह असाधारण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन खिलाड़ियों को भविष्य में भी ऐसे अवसर लगातार मिलने चाहिए और उन्हें वैश्विक क्रिकेट समुदाय का स्थायी हिस्सा माना जाना चाहिए।

तालिबान शासन के बाद अफगान महिला क्रिकेटरों की कहानी संघर्ष, विस्थापन और अटूट प्रतिबद्धता की मिसाल बन चुकी है। ECB, MCC और सहयोगी संस्थाओं की यह पहल केवल एक क्रिकेट दौरा नहीं, बल्कि महिला खिलाड़ियों के समर्थन, समान अवसर और खेल में समावेशिता का मजबूत वैश्विक संदेश बनकर उभरी है।

Pratahkal Bureau

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