कौन हैं अब्दुल समद? जम्मू-कश्मीर से निकलकर भारतीय क्रिकेट में धमाकेदार पहचान बनाने वाला सितारा
आईपीएल में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले अब्दुल समद ने जम्मू-कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी खिताब जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हुए अब्दुल समद। जम्मू के इस युवा खिलाड़ी ने घरेलू सत्र 2025-26 में अपनी टीम को रणजी खिताब दिलाने के लिए सर्वाधिक 748 रन बनाए।
भारतीय क्रिकेट में जहां बड़े शहरों और स्थापित केंद्रों से प्रतिभाएं उभरती रही हैं, वहीं अब्दुल समद ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी से इस धारणा को चुनौती देते हुए एक अलग पहचान बनाई है। इंडियन प्रीमियर लीग में फिनिशर की भूमिका निभाते हुए उन्होंने कई मौकों पर अपनी ताकत और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया, जिससे वह सीमित अवसरों के बावजूद चर्चा में बने रहे। युवा उम्र में ही तेज गेंदबाज़ों के खिलाफ आक्रामक शॉट खेलने की उनकी क्षमता ने उन्हें एक अलग श्रेणी का बल्लेबाज़ बना दिया है, जो मैच का रुख पलटने की ताकत रखता है।
इस चमकदार मुकाम तक पहुंचने की कहानी संघर्ष और साहस से भरी हुई है। जम्मू-कश्मीर के कालाकोट गांव में जन्मे समद ने बचपन से ही क्रिकेट के प्रति गहरा लगाव विकसित किया। बेहतर शिक्षा और क्रिकेटिंग सुविधाओं की तलाश में उनका परिवार 2009 में सिधरा चला गया, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी। महज 16 वर्ष की उम्र में जम्मू में एक ट्रायल के दौरान उनकी बल्लेबाज़ी ने पूर्व भारतीय ऑलराउंडर Irfan Pathan और कोच मिलाप मेवादा का ध्यान आकर्षित किया। तेज गेंदबाज़ों को उछाल पर खेलते हुए बड़े शॉट लगाने की उनकी काबिलियत ने उन्हें तुरंत खास बना दिया।
आईपीएल में उनकी एंट्री भी इसी प्रतिभा के दम पर हुई, जब उनके कोच की सिफारिश पर VVS Laxman ने उन्हें सनराइजर्स हैदराबाद के लिए चुना। पांच सीजन तक टीम के साथ रहते हुए उन्होंने अनुभव हासिल किया और कई अहम पारियां खेलीं, हालांकि निरंतरता की कमी के कारण उन्हें टीम से रिलीज कर दिया गया। इसके बाद 2025 सीजन से पहले लखनऊ सुपर जायंट्स ने उन पर भरोसा जताया। हालांकि उनका प्रदर्शन अपेक्षाकृत शांत रहा, फिर भी फ्रेंचाइजी ने उनकी क्षमता को देखते हुए उन्हें टीम में बनाए रखा, जो उनके भविष्य के प्रति विश्वास को दर्शाता है।
घरेलू क्रिकेट में समद का प्रदर्शन लगातार निखरता गया और उन्होंने अपनी उपयोगिता को साबित किया। 2024-25 रणजी ट्रॉफी सीजन में उन्होंने ओडिशा के खिलाफ कटक में एक ही मैच में दो शतक जड़कर सुर्खियां बटोरीं। यह प्रदर्शन उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जिसने उन्हें एक भरोसेमंद बल्लेबाज़ के रूप में स्थापित किया। इसके बाद 2025-26 सीजन में उन्होंने और भी बड़ा कारनामा किया, जब जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता।
इस ऐतिहासिक जीत में अब्दुल समद का योगदान सबसे अहम रहा, जहां उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 748 रन बनाकर टीम के शीर्ष स्कोरर का दर्जा हासिल किया। इस दौरान उनके बल्ले से एक शतक और पांच अर्धशतक निकले, जो उनकी निरंतरता और मैच जिताने की क्षमता को दर्शाते हैं। एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में, जो छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है, समद की कहानी युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
आज अब्दुल समद केवल एक उभरते हुए क्रिकेटर नहीं, बल्कि उस बदलाव का प्रतीक हैं, जहां प्रतिभा भौगोलिक सीमाओं को पार कर राष्ट्रीय मंच पर अपनी जगह बना रही है। उनकी आक्रामक शैली और कठिन परिस्थितियों से उभरने की कहानी उन्हें भारतीय क्रिकेट के भविष्य का एक अहम चेहरा बनाती है।

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