'Our Power, Our Planet' के जयघोष के साथ सजेगा नेशनल साइंस सेंटर; अंटार्कटिका के रहस्यों से उठेगा पर्दा
World Earth Day 2026 : नेशनल साइंस सेंटर में ISRO प्रोफेसर डॉ. अमिताव सेन गुप्ता का विशेष व्याख्यान और छात्रों के लिए मेगा क्विज। जानें क्या है इस बार की खास थीम।

अंतरिक्ष से पृथ्वी का दृश्य जिसके चारों ओर मानव निर्मित मलबे का घेरा दिख रहा है
World Earth Day 2026 Theme : बढ़ते वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन के खतरनाक संकेतों के बीच पूरी दुनिया कल, 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस मनाने की तैयारी कर रही है। इस वैश्विक मुहिम का हिस्सा बनते हुए देश की राजधानी स्थित 'नेशनल साइंस सेंटर' ने एक भव्य और प्रेरणादायी कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की है। इस वर्ष पृथ्वी दिवस की थीम “Our Power, Our Planet” (हमारी शक्ति, हमारा ग्रह) रखी गई है, जो न केवल इंसानी सामर्थ्य को रेखांकित करती है बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में हमारी सामूहिक जवाबदेही का भी आह्वान करती है। यह आयोजन एक ऐसे समय में हो रहा है जब मानव जाति को प्रकृति के साथ अपने संबंधों को पुनर्परिभाषित करने की नितांत आवश्यकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 10:00 बजे एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक विज्ञान व्याख्यान के साथ होगा। इस सत्र की मुख्य विशेषता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अंतरिक्ष विभाग के प्रतिष्ठित प्रोफेसर डॉ. अमिताव सेन गुप्ता की उपस्थिति रहेगी। डॉ. गुप्ता "Exploring Antarctica: A Journey to the White Continent" (अंटार्कटिका की खोज: श्वेत महाद्वीप की एक यात्रा) विषय पर अपने दुर्लभ अनुभवों को साझा करेंगे। अंटार्कटिका, जो पृथ्वी के सबसे रहस्यमयी और दुर्गम हिस्सों में से एक है, वहां हो रहे वैज्ञानिक अनुसंधानों और वहां की बदलती परिस्थितियों का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। यह व्याख्यान छात्रों और विज्ञान प्रेमियों के लिए किसी रोमांचक सफर से कम नहीं होगा।
वैज्ञानिक चर्चाओं के बाद, नई पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील और जागरूक बनाने के लिए सुबह 11:00 बजे एक 'ओपन हाउस क्विज कॉन्टेस्ट' का आयोजन किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का मुख्य केंद्र पर्यावरण विज्ञान और जैव विविधता रहेगा। प्रश्नोत्तरी के माध्यम से छात्रों की वैज्ञानिक तार्किकता को परखा जाएगा और उन्हें हमारे पारिस्थितिकी तंत्र की जटिलताओं को समझने के लिए प्रेरित किया जाएगा। नेशनल साइंस सेंटर का यह प्रयास केवल सूचना देना भर नहीं है, बल्कि युवा मस्तिष्क में उन बीजों को बोना है जो भविष्य में एक हरित और सुरक्षित पृथ्वी की नींव रखेंगे।
इस गरिमामयी आयोजन का समापन पृथ्वी की रक्षा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की महत्ता को प्रतिपादित करने वाले संकल्प के साथ होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मंच शिक्षाविदों और आम जनता के बीच की दूरी को पाटते हैं, जिससे संरक्षण के प्रयासों को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलती है। कल होने वाला यह कार्यक्रम न केवल अंटार्कटिका जैसे बर्फीले महाद्वीप की चुनौतियों को दिल्ली के छात्रों के सामने लाएगा, बल्कि उन्हें यह भी समझाएगा कि कैसे उनकी छोटी सी वैज्ञानिक सोच इस नीले ग्रह को विनाश से बचाने में 'महाशक्ति' साबित हो सकती है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
