नासा का अंतरिक्ष यान पृथ्वी की ओर

वाशिंगटन/नई दिल्ली | 11 मार्च, 2026

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का एक विशाल अंतरिक्ष यान, जिसका मिशन सालों पहले समाप्त हो चुका था, अब अनियंत्रित होकर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने के लिए तैयार है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 'वैन एलन प्रोब ए' (Van Allen Probe A) नाम का यह यान उम्मीद से कई साल पहले ही पृथ्वी की कक्षा से नीचे गिर रहा है।

कब और कहां होगा री-एंट्री?

नासा और अमेरिकी स्पेस फोर्स के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक, 1,323 पाउंड (लगभग 600 किलोग्राम) वजनी यह वाहन मंगलवार शाम (अमेरिकी समयानुसार) या बुधवार सुबह के आसपास वायुमंडल से टकरा सकता है। विशेषज्ञों ने इसकी री-एंट्री का समय मंगलवार शाम 7:45 बजे (ET) के करीब बताया है, जिसमें 24 घंटे की देरी या जल्दबाजी की संभावना (Uncertainty) भी शामिल है।

नासा का कहना है कि जैसे ही यह यान पृथ्वी के घने वायुमंडल में प्रवेश करेगा, घर्षण के कारण इसमें आग लग जाएगी और इसका अधिकांश हिस्सा जलकर राख हो जाएगा। हालांकि, यान के कुछ मजबूत हिस्से जलने से बच सकते हैं और धरती की सतह तक पहुंच सकते हैं।

इंसानों को कितना खतरा? (The Risk Factor)

अंतरिक्ष एजेंसी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया है कि इस मलबे के किसी व्यक्ति को नुकसान पहुँचाने की संभावना बहुत कम है। नासा के अनुसार:

  • किसी व्यक्ति के चोटिल होने की संभावना 4,200 में से 1 है।
  • यद्यपि यह जोखिम 2018 में चीन के अंतरिक्ष स्टेशन (जिसका खतरा एक ट्रिलियन में एक था) की तुलना में अधिक है, फिर भी इसे 'बहुत कम जोखिम' की श्रेणी में रखा गया है।
  • स्पेस-ट्रैकिंग कंपनी लियोलैब्स (LeoLabs) के वरिष्ठ तकनीकी फेलो डॉ. डैरेन मैकनाइट ने कहा, "हमने पहले भी ऐसी चीजों की री-एंट्री देखी है जहां खतरा 1,000 में 1 था और कुछ नहीं हुआ। 4,000 या 5,000 में 1 का जोखिम मानवता के लिए कोई 'भयानक दिन' नहीं है।"

क्या था 'वैन एलन प्रोब' मिशन?

नासा ने साल 2012 में दो जुड़वां अंतरिक्ष यान (प्रोब A और प्रोब B) लॉन्च किए थे। इनका मुख्य काम पृथ्वी के चारों ओर मौजूद 'वैन एलन रेडिएशन बेल्ट' का अध्ययन करना था।

इन बेल्ट्स का महत्व:

  • यह रेडिएशन बेल्ट पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में फंसी उच्च-ऊर्जा कणों की दो पट्टियाँ हैं।
  • ये पट्टियाँ पृथ्वी को ब्रह्मांडीय विकिरण (Cosmic Radiation), सौर तूफानों और सौर हवाओं से बचाती हैं।
  • इन कणों को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि ये इंसानों और हमारी आधुनिक सैटेलाइट तकनीक को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

शानदार मिशन, अचानक वापसी

इन यानों ने उम्मीद से कहीं ज्यादा सालों तक काम किया। साल 2019 में जब इनका ईंधन (Fuel) पूरी तरह खत्म हो गया, तब इनका मिशन आधिकारिक रूप से समाप्त घोषित कर दिया गया। अपने जीवनकाल के दौरान, इन प्रोब्स ने कई बड़ी खोजें कीं, जिनमें सबसे प्रमुख 'तीसरी रेडिएशन बेल्ट' का पता लगाना था, जो तीव्र सौर गतिविधि के दौरान बनती है।

अंतरिक्ष मलबे की समस्या

यह घटना एक बार फिर अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) की बढ़ती समस्या की ओर ध्यान दिलाती है। जब पुराने सैटेलाइट या यान बेकार हो जाते हैं, तो वे सालों तक पृथ्वी की कक्षा में चक्कर काटते रहते हैं और अंततः गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे गिर जाते हैं। नासा ऐसी स्थितियों पर बारीकी से नजर रखता है ताकि किसी भी संभावित खतरे को पहले ही भांप लिया जाए।


फिलहाल डरने की कोई बात नहीं है। अधिकांश अंतरिक्ष यान समुद्र या निर्जन स्थानों पर गिरते हैं क्योंकि पृथ्वी का 70% हिस्सा पानी है। नासा और वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियां इस यान की गति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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