2025 बना इतिहास का सबसे व्यस्त वर्ष; रिकॉर्ड लॉन्च के बीच स्पेस मलबे का खतरा बढ़ा
ISSAR-2025 रिपोर्ट: अंतरिक्ष युग का सबसे व्यस्त साल रहा 2025। रिकॉर्ड 328 लॉन्च और 1.6 लाख मलबे के अलर्ट ने स्पेस ट्रैफिक मैनेजमेंट पर बढ़ाई चिंता। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

इसरो के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरता जीएसएलवी रॉकेट
Indian Space Situational Assessment Report 2025 : मानव इतिहास के अंतरिक्ष युग में वर्ष 2025 एक ऐसे मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है, जिसने प्रगति और चुनौती दोनों के नए आयाम स्थापित किए हैं। 'भारतीय अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता रिपोर्ट (ISSAR-2025)' के नवीनतम आंकड़ों ने दुनिया को चौंका दिया है, जिसके अनुसार 2025 अंतरिक्ष गतिविधियों के मामले में अब तक का सबसे व्यस्त और सक्रिय वर्ष रहा। इस एक वर्ष के भीतर वैश्विक स्तर पर कुल 328 अंतरिक्ष प्रक्षेपणों के प्रयास किए गए, जिनमें से 315 मिशनों ने सफलतापूर्वक अपनी मंजिल पाई। इन अभियानों के जरिए 4,651 नवीन अंतरिक्ष पिंडों को ब्रह्मांड की अनंत गहराईयों में स्थापित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 74.5 प्रतिशत की एक अविश्वसनीय वार्षिक वृद्धि है।
ब्रह्मांड की निचली कक्षा (LEO) में बढ़ती इस भीड़ का सबसे बड़ा कारण 'राइडशेयर' मिशनों की बढ़ती लोकप्रियता रही। स्पेसएक्स के ट्रांसपोर्टर श्रृंखला के मिशनों ने एक ही बार में सत्तर से अधिक पेलोड अंतरिक्ष में भेजकर लॉन्चिंग की परिभाषा बदल दी। विशेष रूप से 28 नवंबर 2025 को एक ही रॉकेट से रिकॉर्ड 140 पेलोड लॉन्च किए गए, जो तकनीकी श्रेष्ठता का प्रमाण है। इसके साथ ही एलन मस्क की स्टारलिंक परियोजना ने भी अपनी धमक बरकरार रखी, जिसके अब तक के कुल 10,749 उपग्रहों में से 9,396 वर्तमान में सक्रिय रूप से कक्षा में मौजूद हैं। निजी क्षेत्र का बढ़ता दबदबा केवल पृथ्वी की कक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चंद्रमा पर भी चार निजी मिशन भेजे गए, जिनमें 'ब्लू घोस्ट मिशन 1' ने चंद्रमा की सतह पर पहली निजी सॉफ्ट लैंडिंग कर एक नया इतिहास रच दिया।
हालांकि, अंतरिक्ष की यह चकाचौंध अपने साथ एक गंभीर संकट भी लेकर आई है। रिपोर्ट में 'स्पेस डेब्रिस' यानी अंतरिक्ष मलबे को लेकर गहरी चिंता जताई गई है। वर्ष 2025 में सक्रिय उपग्रहों के एक-दूसरे के करीब आने के लगभग 1,60,000 अलर्ट प्राप्त हुए, जो यह संकेत देते हैं कि अंतरिक्ष में अब 'ट्रैफिक मैनेजमेंट' एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में 1,911 वस्तुएं वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर नष्ट हो गईं, जिनमें पुराने अंतरिक्ष यान और रॉकेटों के हिस्से शामिल थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रक्षेपण की यही रफ्तार रही, तो भविष्य में मलबे की मात्रा सक्रिय उपग्रहों से भी अधिक हो सकती है, जिससे 'केसलर सिंड्रोम' जैसी स्थिति पैदा होने का डर है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह वर्ष गौरव और संघर्ष का मिश्रण रहा। इसरो (ISRO) के लिए जीएसएलवी-एफ15 का सफल प्रक्षेपण भारतीय लॉन्च वाहनों का 100वां ऐतिहासिक सफर साबित हुआ। साथ ही, नासा और इसरो का संयुक्त मिशन 'एनआईएसएआर' (NISAR) 30 जुलाई 2025 को सफलतापूर्वक अपनी कक्षा में स्थापित हुआ, जो वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग की एक बड़ी जीत है। हालांकि, पीएसएलवी-सी61 के तीसरे चरण में आई तकनीकी समस्या के कारण ईओएस-9 मिशन अपनी कक्षा तक नहीं पहुंच सका। इन चुनौतियों के बावजूद, भारत ने वर्षभर में कुल 8 उपग्रहों को सफलतापूर्वक स्थापित कर अपनी वैश्विक धाक को और मजबूत किया है। 2025 की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि अब अंतरिक्ष केवल खोज का विषय नहीं, बल्कि एक ऐसा व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र बन चुका है जहाँ सुरक्षा और संधारणीयता ही भविष्य की कुंजी होगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
