मिसाइल जैसी रफ्तार और चीते जैसी नज़र! 'मिशन दृष्टि' ने बदला स्पेस का खेल, अब हर मौसम में दुश्मन पर होगी भारत की पैनी नज़र।
बेंगलुरु के स्टार्टअप ने SpaceX रॉकेट से लॉन्च किया भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट सैटेलाइट; OptoSAR तकनीक से मिलेगी हर मौसम में सटीक जानकारी।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बेंगलुरु के स्टार्टअप GalaxEye द्वारा निर्मित भारत के सबसे बड़े निजी सैटेलाइट 'मिशन दृष्टि' की सफलता को सराहा।
भारत ने वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक नया अध्याय जोड़ते हुए निजी क्षेत्र की भागीदारी का लोहा मनवाया है। बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप GalaxEye ने सफलतापूर्वक 'मिशन दृष्टि' के अंतर्गत दुनिया का पहला हाइब्रिड OptoSAR सैटेलाइट लॉन्च कर अंतरिक्ष जगत में हलचल पैदा कर दी है। 190 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट भारत का अब तक का सबसे बड़ा निजी तौर पर निर्मित स्पेसक्राफ्ट है, जिसे एलन मस्क की कंपनी SpaceX के फाल्कन-9 रॉकेट के माध्यम से उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया है। यह उपलब्धि केवल एक कंपनी की सफलता नहीं है, बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र की शक्ति का जीवंत उदाहरण है।
इस मिशन की ऐतिहासिक सफलता पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारतीय स्टार्टअप की सराहना करते हुए इसे देश की "बढ़ती वैश्विक पहचान" का प्रतीक बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में रेखांकित किया कि GalaxEye का यह नवाचार न केवल तकनीकी रूप से श्रेष्ठ है, बल्कि यह हमारे उद्यमियों की उस क्षमता को भी दर्शाता है जो भारत के तकनीकी और नवाचार ईकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान कर रहे हैं। विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मिशन वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और व्यावसायिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करते हैं।
'मिशन दृष्टि' की तकनीकी विशिष्टता इसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे खड़ा करती है। इस सैटेलाइट में प्रयुक्त OptoSAR टेक्नोलॉजी दुनिया में अपनी तरह की पहली हाइब्रिड प्रणाली है। पारंपरिक सैटेलाइट या तो ऑप्टिकल सेंसर (कैमरे) का उपयोग करते हैं या सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) का। ऑप्टिकल सेंसर रात के समय या घने बादलों के दौरान दृश्यता खो देते हैं, जबकि रडार डेटा का विश्लेषण करना काफी जटिल होता है। GalaxEye ने इन दोनों तकनीकों का मिश्रण कर एक ऐसा हाइब्रिड सिस्टम विकसित किया है, जो हर मौसम और हर समय में सटीक और उच्च गुणवत्ता वाला डेटा प्रदान करने में सक्षम है। यह तकनीक विशेष रूप से सीमा सुरक्षा, बुनियादी ढांचे की निगरानी और सटीक मानचित्रण के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।
यह परियोजना सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) का एक उत्कृष्ट मॉडल पेश करती है। इस मिशन के दौरान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपनी अत्याधुनिक सुविधाओं का उपयोग सैटेलाइट की टेस्टिंग के लिए प्रदान किया, वहीं IN-SPACe ने विनियामक प्रक्रियाओं को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, डेटा के वैश्विक वितरण के लिए स्टार्टअप ने न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के साथ एक रणनीतिक समझौता किया है। यह 'प्लग-एंड-प्ले' मॉडल यह स्पष्ट करता है कि कैसे भारतीय निजी संस्थाएं घरेलू स्तर पर तकनीक विकसित कर रही हैं और वैश्विक लॉन्च सुविधाओं का लाभ उठाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैठ बना रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 'मिशन दृष्टि' रक्षा और नागरिक दोनों क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है। रक्षा के क्षेत्र में यह खराब मौसम के बावजूद सीमा पर दुश्मन की गतिविधियों को ट्रैक कर सकता है, जबकि नागरिक उपयोग में यह कृषि उत्पादकता और बीमा क्षेत्र में जोखिम मूल्यांकन को अधिक सटीक बनाएगा। वर्तमान में मध्य पूर्व, अमेरिका और यूरोप के रक्षा क्षेत्रों से इस तकनीक की भारी मांग देखी जा रही है। भारत की यह छलांग न केवल वैश्विक अंतरिक्ष दिग्गजों के एकाधिकार को चुनौती देती है, बल्कि भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषणों के लिए एक नया और अधिक सुलभ मार्ग भी प्रशस्त करती है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
