Former ISRO scientist alleges hypersonic missile data leak to foreign spies : भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के भीतर एक बार फिर जासूसी और षड्यंत्र के आरोपों ने देश की सुरक्षा व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) के एक पूर्व वैज्ञानिक मौर्य ने सनसनीखेज आरोप लगाए हैं कि डीआरडीओ (DRDO) की अति-संवेदनशील 'एडी-1' (AD-1) हाइपरसोनिक मिसाइल का डेटा एक उच्चाधिकारी द्वारा विदेशी जासूसी नेटवर्क को लीक किया गया है। यह मामला केवल डेटा चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक ईमानदार वैज्ञानिक को चुप कराने के लिए अपहरण, प्रताड़ना और झूठे मुकदमों में फंसाने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं, जो दशकों पुराने प्रसिद्ध नंबी नारायणन मामले की भयावह यादें ताजा कर रहे हैं।

विस्तृत विवरण के अनुसार, मौर्य का दावा है कि VSSC के विंड टनल में परीक्षण के दौरान उत्पन्न हुआ मिसाइल डेटा दुबई और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से जुड़े जासूसों तक पहुंचाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने साल 2022 में एक कथित 'माओवादी देशद्रोही लॉबी' का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया, तो उनके खिलाफ प्रतिशोध की कार्रवाई शुरू हुई। वैज्ञानिक के अनुसार, उन्हें रात के अंधेरे में उठाया गया, शारीरिक यातनाएं दी गईं और उन पर फर्जी आपराधिक मामले थोपे गए। हालांकि, नवंबर 2024 तक अदालतों ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया और इसरो ने भी मई 2022 में ही उनका निलंबन रद्द कर दिया था, लेकिन मौर्य का कहना है कि उन्हें अब भी 'हनी ट्रैप' और मानसिक रूप से अस्थिर बताकर बदनाम करने की कोशिशें की जा रही हैं।

यह मामला ऐसे समय में दोबारा गरमाया है जब इसरो हाल के वर्षों में कुछ तकनीकी विफलताओं से जूझ रहा है, जिनमें 2021 का GSLV-F10 और जनवरी 2026 का PSLV-C62 मिशन शामिल हैं। यद्यपि आधिकारिक जांच में इन विफलताओं का कारण तकनीकी खराबी बताया गया है, लेकिन मौर्य के आरोपों ने 'सबोताज' या भीतरघात की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। वैज्ञानिक ने अब इस पूरे प्रकरण की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) स्तर पर स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह केवल उनके निजी मान-सम्मान की लड़ाई नहीं है, बल्कि देश की सामरिक सुरक्षा से जुड़ी एक गहरी साजिश का पर्दाफाश करना अनिवार्य है।

वर्तमान में इसरो और संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यदि इन दावों में लेशमात्र भी सत्यता है, तो यह भारत के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर एक बहुत बड़ी सुरक्षा चूक की ओर संकेत करता है। एक तरफ जहां भारत अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है, वहीं संस्थानों के भीतर मौजूद ऐसे कथित 'दीमक' देश की मेहनत और गोपनीयता को खतरे में डाल सकते हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह अनिवार्य कर दिया है कि हमारे शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और आंतरिक प्रशासन की गहन समीक्षा की जाए ताकि भविष्य में किसी भी 'हथियार डेटा लीक' की संभावना को जड़ से मिटाया जा सके।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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