DRDO की बड़ी कामयाबी: स्वदेशी 'टैंक किलर' मिसाइल का सफल टेस्ट; मूविंग टारगेट को पलक झपकते ही किया तबाह
DRDO ने स्वदेशी मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का मूविंग टारगेट पर सफल परीक्षण कर रचा इतिहास। महाराष्ट्र के अहिल्या नगर में हुए इस टेस्ट ने भारत की 'टॉप अटैक' और 'फायर एंड फॉरगेट' युद्धक क्षमता को साबित किया। अत्याधुनिक इंफ्रारेड तकनीक और टैंडम वारहेड से लैस यह मिसाइल भारतीय सेना को बनाएगी और भी शक्तिशाली। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

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DRDO successful flight test of MPATGM on moving target : भारत ने रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता' की दिशा में आज एक और ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से विकसित 'मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल' (MPATGM) का सफल उड़ान परीक्षण किया। महाराष्ट्र के अहिल्या नगर स्थित केके रेंज में हुए इस परीक्षण की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि मिसाइल ने एक गतिशील (मूविंग) टारगेट पर सटीक निशाना साधते हुए अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाया। यह सफलता भारतीय थल सेना के बेड़े में आधुनिक 'टैंक किलर' तकनीक के शामिल होने की दिशा में अंतिम और निर्णायक कदम मानी जा रही है।
'दागो और भूल जाओ': आधुनिक युद्ध की नई परिभाषा
यह मिसाइल तीसरी पीढ़ी की 'फायर एंड फॉरगेट' (Fire and Forget) श्रेणी की है, जिसे अत्याधुनिक 'टॉप अटैक' क्षमता से लैस किया गया है। इसका अर्थ है कि एक बार प्रक्षेपित होने के बाद यह मिसाइल खुद ही लक्ष्य का पीछा करती है और टैंक के सबसे ऊपरी (कमजोर) हिस्से पर प्रहार करती है।
- बहुमुखी तैनाती: इसे ट्राइपॉड या सैन्य वाहनों पर लगे लॉन्चर से दागा जा सकता है, जो युद्ध क्षेत्र में सैनिकों को असाधारण लचीलापन प्रदान करता है।
- दिन-रात संचालन: इसमें लगा 'इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर' दिन की चिलचिलाती धूप और रात के घने अंधेरे, दोनों ही परिस्थितियों में दुश्मन को खोजने और नष्ट करने में सक्षम है।
स्वदेशी तकनीक का अनूठा संगम :
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह मिसाइल पूरी तरह से भारतीय मेधा और तकनीक का परिणाम है। हैदराबाद स्थित डीआरडीएल (DRDL) के नेतृत्व में देश की विभिन्न प्रयोगशालाओं ने इसकी उप-प्रणालियों को विकसित किया है:
- तुलनात्मक श्रेष्ठता: इसमें टैंडम वारहेड, ऑल-इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्टुएशन सिस्टम और उच्च प्रदर्शन वाली दृष्टि प्रणाली (High Performance Sight System) जैसे जटिल तंत्र शामिल हैं।
- सहयोग की शक्ति: परीक्षण के दौरान जोधपुर की डिफेंस लैबोरेटरी द्वारा विकसित 'थर्मल टार्गेट सिस्टम' का उपयोग कर वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति पैदा की गई, जिसे मिसाइल ने सफलतापूर्वक पार किया।
रणनीतिक साझेदारी और उत्पादन :
इस मिसाइल के निर्माण में केवल सरकारी प्रयोगशालाएं ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। 'भारत डायनेमिक्स लिमिटेड' (BDL) और 'भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड' (BEL) इस हथियार प्रणाली के 'डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर' हैं। इनका सहयोग यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में भारतीय सेना को इन मिसाइलों की आपूर्ति निर्बाध और तीव्र गति से हो सके।
शीर्ष नेतृत्व की सराहना :
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस गौरवशाली उपलब्धि पर DRDO और उद्योग जगत के साझेदारों को बधाई देते हुए इसे 'आत्मनिर्भर भारत' का एक सशक्त उदाहरण बताया। वहीं, DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह सफल परीक्षण भारतीय सेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। अब वह दिन दूर नहीं जब भारतीय सीमाओं की रक्षा स्वदेशी 'टैंक किलर' के हाथों में होगी, जो दुनिया के किसी भी आधुनिक युद्धक टैंक को धूल चटाने की क्षमता रखता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
