अंतरिक्ष यात्री Shubhanshu Shukla को 'अशोक चक्र'; ISS पर तिरंगा फहराने वाले पहले भारतीय
अंतरिक्ष यात्री शुल्का को ISS पर कदम रखने और एक्ज़िओम-4 मिशन में असाधारण साहस दिखाने के लिए अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान पाने वाले वे पहले अंतरिक्ष यात्री हैं। 18 दिनों के रोमांचक मिशन और वैज्ञानिक प्रयोगों के साथ उन्होंने भारत का नाम रोशन किया। जानें इस ऐतिहासिक सम्मान, अंतरिक्ष के जोखिमों और इस पर उठ रहे विवाद की पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

Highest peacetime gallantry award Ashok Chakra : भारत के शौर्य के इतिहास में आज एक ऐसा पन्ना जुड़ गया है, जिसकी चमक पृथ्वी की सीमाओं को लांघकर अंतरिक्ष तक जा पहुंची है। जून 2025 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर कदम रखकर इतिहास रचने वाले भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुल्का को उनकी अदम्य वीरता और असाधारण साहस के लिए देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है। यह पहली बार है जब अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों में जोखिम उठाने वाले किसी 'स्पेस-हीरो' को इस प्रतिष्ठित पदक से नवाजा गया है।
मिशन एक्ज़िओम-4: 18 दिनों का रोमांचक सफर
शुल्का की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। उनके ऐतिहासिक मिशन के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:
ऐतिहासिक क्षण: स्पेसएक्स (SpaceX) के क्रू ड्रैगन कैप्सूल के जरिए रवाना हुए शुल्का ISS पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बने।
वैज्ञानिक अनुसंधान: 18 दिनों के इस मिशन के दौरान उन्होंने सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) में जटिल वैज्ञानिक प्रयोग किए और पृथ्वी के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा।
असाधारण जोखिम: पुन: प्रवेश (Re-entry) के दौरान उत्पन्न होने वाली जानलेवा परिस्थितियों और अंतरिक्ष के प्रतिकूल वातावरण में उनके धैर्य को देखते हुए सरकार ने उन्हें वीरता पुरस्कार के लिए चुना।
संवैधानिक सम्मान और विवाद की गूंज :
अशोक चक्र आमतौर पर युद्ध के मैदान से इतर असाधारण वीरता दिखाने वाले सैनिकों या नागरिकों को दिया जाता है। शुल्का को यह सम्मान दिए जाने के फैसले ने जहां पूरे देश को गौरवन्वित किया है, वहीं रक्षा विशेषज्ञों के एक वर्ग में बहस भी छेड़ दी है। आलोचकों का तर्क है कि एक 'कमर्शियल' (व्यावसायिक) मिशन के लिए युद्ध-स्तर के पदकों का उपयोग मानकों पर सवाल खड़ा कर सकता है। हालांकि, सरकार का पक्ष स्पष्ट है कि अंतरिक्ष यात्रा के दौरान आने वाले तकनीकी और शारीरिक जोखिम किसी भी युद्ध क्षेत्र की चुनौती से कम नहीं हैं।
"सामूहिक साहस का प्रतिबिंब": शुल्का का संदेश
सम्मान मिलने के बाद शुल्का ने अपनी भावनाओं को साझा करते हुए इसे सवा सौ करोड़ भारतीयों के सामूहिक साहस का परिणाम बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह पदक उनके लिए नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के सपनों के लिए है जो भविष्य में तारों को छूने की हिम्मत रखते हैं। उनकी बहन ने भी परिवार की ओर से खुशी जाहिर करते हुए इसे 'देश के लिए सबसे गर्व का क्षण' बताया।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
