Assam Don Bosco University first satellite mission Lachit-1 launch 2026 : पूर्वोत्तर भारत के शैक्षणिक और वैज्ञानिक इतिहास में एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय लिखा जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। असम डोन बॉस्को यूनिवर्सिटी (ADBU) ने अपने पहले अंतरिक्ष मिशन की घोषणा कर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों की अटूट मेहनत से तैयार किया गया नैनो-सैटेलाइट 'लाचित-1' लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार है। इस मिशन के साथ ही ADBU पूर्वोत्तर भारत की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी बन जाएगी, जिसने अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) के क्षेत्र में इतनी साहसिक और सफल छलांग लगाई है।

वीर लाचित बरफुकन की विरासत और आधुनिक विज्ञान का संगम :

इस उपग्रह का नाम महान अहोम सेनापति वीर लाचित बरफुकन के सम्मान में रखा गया है। लाचित बरफुकन न केवल असम के रक्षक थे, बल्कि वे साहस और स्वदेशी गौरव के भी प्रतीक हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य इस मिशन के जरिए युवाओं में उन्हीं मूल्यों को तकनीक और इनोवेशन के साथ जोड़ना है।

छात्रों की मेधा: 2022 से शुरू हुआ यह 'मिशन अंतरिक्ष'। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की नींव वर्ष 2022 में प्रोफेसर बिक्रमजीत काकती के मार्गदर्शन में रखी गई थी।

  • कोर टीम का नेतृत्व: पांच प्रतिभाशाली छात्रों की एक कोर टीम इस पूरे मिशन का संचालन कर रही है।

  • तकनीकी समूह: लगभग 20 छात्रों के विभिन्न समूह सैटेलाइट डिजाइन, इंजीनियरिंग, डेटा सिस्टम, कम्युनिकेशन और मिशन प्लानिंग जैसे जटिल तकनीकी पहलुओं पर रात-दिन काम कर रहे हैं।

  • अनुभवात्मक शिक्षा: प्रोजेक्ट से जुड़े शोधकर्ताओं का कहना है कि यह केवल एक उपग्रह नहीं, बल्कि अकादमिक ज्ञान को वास्तविक दुनिया की समस्याओं से जोड़ने का एक अनूठा प्रयोग है।

आपदा प्रबंधन और पर्यावरण निगरानी का 'प्रहरी' :

'लाचित-1' को केवल अंतरिक्ष की सैर के लिए नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक चुनौतियों के समाधान के लिए डिजाइन किया गया है।

  • डेटा संकलन: यह सैटेलाइट भूस्खलन, बाढ़, मौसम के बदलते मिजाज और पर्यावरणीय बदलावों की सूक्ष्म निगरानी करेगा।

  • जलवायु अनुसंधान: नॉर्थईस्ट में आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए यह उपग्रह महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराएगा, जिससे प्राकृतिक आपदाओं के समय सटीक और त्वरित कदम उठाए जा सकेंगे।

पूर्वोत्तर के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर :

यूनिवर्सिटी में इंडिजिनस नॉलेज के डायरेक्टर दिनेश बैश्य ने इस मिशन को क्षेत्र के लिए 'क्रांतिकारी' बताया है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब नॉर्थईस्ट की किसी यूनिवर्सिटी ने अपनी तकनीकी क्षमताओं को राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने के लिए सितारों तक पहुँचने का सपना देखा है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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