मूल्यविहीन शिक्षा केवल बौद्धिक विकास तक सीमित रहती है, जबकि संस्कारों को श्रेष्ठ बनाने और राष्ट्रहित में योगदान की प्रेरणा के लिए मूल्यपरक शिक्षा अनिवार्य है। तेलंगाना उच्च शिक्षा समिति अध्यक्ष प्रो. डॉ. वी. बालाकिस्ता रेड्डी ने यह बात शनिवार को ब्रह्माकुमारी संगठन के ज्ञान सरोवर अकादमी परिसर में शिक्षा प्रभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार के खुले सत्र को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि सामाजिक विसंगतियों को दूर करने के भगीरथ प्रयास में जुटा ब्रह्माकुमारी संगठन विश्व स्तर पर मूल्यों का प्रकाश फैलाने में दिन दुगनी रात चौगुनी प्रगति कर रहा है।

जयपुर एसजीवी यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर डॉ. रितु गिल्होत्रा ने कहा कि शिक्षा स्तर की गुणवत्ता में सुधार आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों के बल पर ही संभव है। समाज में मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए मूल्य आधारित शैक्षणिक पाठ्यक्रमों का समावेश आवश्यक है।

दिल्ली जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रो. दीपेंद्र दास ने कहा कि शिक्षा का महत्व बच्चों के स्कूल बैग के वजन से नहीं, बल्कि उनके आंतरिक निर्माण से आंका जाना चाहिए।

ब्रह्माकुमारी संगठन के शिक्षा प्रभाग की दिल्ली संयोजिका राजयोगिनी सुदेश बहन ने कहा कि मूल्यरहित शिक्षा स्वयं ही अर्थविहीन हो जाती है और शिक्षाविदों को इसमें मूल्यों के समावेश का मंत्र सीखना चाहिए।

सूरत से आए पीपी सवानी यूनिवर्सिटी के प्रो. डॉ. प्राराग सांगहानी ने कहा कि मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा पर हर संभव बल देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मूल्यों की गिरावट के माहौल में मनुष्य अपनी पहचान कैसे बनाए रखे, इस पर गंभीर चिंतन जरूरी है।

कार्यक्रम का संचालन शिक्षा प्रभाग की अधिशासी सदस्या बीके सुप्रिया बहन, पुणे ने किया।

माउंट आबू में आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन शिक्षा जगत के लिए स्पष्ट संदेश छोड़ गया कि मूल्यपरक शिक्षा के बिना समाज और राष्ट्र का संतुलित विकास संभव नहीं।

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