सिरोही। भ्रष्टाचार और नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के खिलाफ राजस्थान के सिरोही जिले में प्रशासन ने कड़ा प्रहार किया है। रेवदर पंचायत समिति के अधीन आने वाली धाण ग्राम पंचायत में सरकारी नियमों को ताक पर रखकर किए गए भूखंड आवंटन के काले खेल का आखिरकार पर्दाफाश हो गया है। पंचायती राज विभाग ने इस गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए न केवल प्रशासक को पद से हटाया है, बल्कि पूरी प्रशासक समिति के सदस्यों पर भी गाज गिराते हुए उन्हें पदच्युत कर दिया है। शासन की इस कठोर कार्रवाई से पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

मामले की जड़ें ग्रामीणों की उन शिकायतों में छिपी थीं, जिनमें धाण ग्राम पंचायत के भीतर भूखंडों के आवंटन में भारी धांधली के आरोप लगाए गए थे। जनभावनाओं और शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जिला परिषद द्वारा इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई गई। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाश चन्द्र ने अपनी सघन जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए। रिपोर्ट के अनुसार, जिला कलेक्टर के स्पष्ट आदेशों और पंचायती राज नियम 158 की सरेआम अवहेलना की गई। कुल 59 भूखंडों का आवंटन ऐसे व्यक्तियों को कर दिया गया, जिनकी पात्रता रिपोर्ट पूरी तरह से अस्पष्ट और आवश्यक दस्तावेजों से विहीन थी। नियम विरुद्ध तरीके से उपकृत करने का यह खेल जांच में पूरी तरह प्रमाणित पाया गया।

इस भ्रष्टाचार के प्रमाणित होने के बाद पंचायती राज विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों पर निर्णायक कार्रवाई की है। जांच में दोषी पाए गए प्रशासक शंकरलाल राणा को तत्काल प्रभाव से पदच्युत कर दिया गया है। उनके साथ ही इस अनियमितता में संलिप्त प्रशासक समिति के सदस्य हरजीराम कोली, जबरसिंह राव, लक्ष्मी देवी पुरोहित, मालाराम कलबी और रमेश कुमार कलबी को भी पदों से बेदखल कर दिया गया है। भ्रष्टाचार की यह आंच केवल जनप्रतिनिधियों और समिति सदस्यों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि तत्कालीन ग्रामसेवक कन्हैयालाल लखारा की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जिला परिषद ने विस्तृत पत्रावली तैयार कर जयपुर मुख्यालय भेज दी है।

धाण ग्राम पंचायत का यह मामला प्रशासन की उस सजगता का प्रतीक है, जहां नियमों के उल्लंघन पर कोई रियायत नहीं बरती गई। एक साथ पूरी समिति को पदच्युत करने का यह निर्णय अन्य पंचायतों के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि पद का दुरुपयोग और सार्वजनिक संपत्ति की बंदरबांट किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई ने जहां ग्रामीणों के विश्वास को बहाल किया है, वहीं यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता और नियमों की लक्ष्मण रेखा लांघने वालों का अंजाम सलाखों और पदच्युति के द्वार तक ही जाता है।

Pratahkal Bureau

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