काम से बनता है रुतबा, पद से नहीं: सिरोही कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर की प्रेरक प्रशासनिक यात्रा
सिरोही कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने IIM अहमदाबाद के बाद IAS चुनकर जनसेवा को प्राथमिकता दी। जानिए उनकी प्रशासनिक यात्रा और प्रेरक कार्यशैली।

तस्वीर में सिरोही जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर अपने कार्यालय कक्ष में मेज पर बैठे नजर आ रहे हैं।
सिरोही। सिरोही जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर अपनी कार्यशैली, ईमानदार प्रशासन और जनसेवा के प्रति समर्पण के कारण युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) अहमदाबाद से एमबीए करने के बाद उनके सामने करोड़ों रुपये के पैकेज वाली निजी नौकरियों के अवसर थे, लेकिन उन्होंने देशसेवा को प्राथमिकता देते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का मार्ग चुना।
वर्तमान में सिरोही जिला कलेक्टर के रूप में कार्यरत रोहिताश्व सिंह तोमर प्रशासन को जनहित से जोड़ने, पारदर्शिता, त्वरित निर्णय और आमजन की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने के लिए जाने जाते हैं। उनकी कार्यशैली ने जिले में प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत किया है।
रोहिताश्व सिंह तोमर का सफर इस बात का उदाहरण है कि "रुतबा पद से नहीं, बल्कि काम और सेवा भावना से बनता है।" उनकी उपलब्धियां और जनसेवा के प्रति समर्पण युवाओं को बड़े सपने देखने तथा समाज और राष्ट्र के लिए योगदान देने की प्रेरणा देता है।
प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया है। वर्तमान में वे 1 अप्रैल 2026 से सिरोही जिले के जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत हैं। अपने प्रशासनिक अनुभव, प्रभावी कार्यशैली और जनहित के प्रति समर्पण के लिए वे पहचाने जाते हैं। वे वर्तमान में भी भारतीय प्रशासनिक सेवा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन और जनहित को प्राथमिकता देने वाली उनकी कार्यशैली उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित करती है।

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