सिरोही में गूंजी शहनाइयां: मारू प्रजापत समाज के 13वें सामूहिक विवाह में बंधे 8 जोड़े, साधु-संतों ने दिया आशीष
सिरोही में बसंत पंचमी पर श्री मारू प्रजापत समाज का 13वां सामूहिक विवाह सम्मेलन भव्यता के साथ संपन्न हुआ। साधु-संतों और विधायक समाराम गरासिया की उपस्थिति में 8 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे। भामाशाहों का सम्मान और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ आयोजित इस कार्यक्रम की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें, जिसमें समाज के प्रमुख पदाधिकारियों और दानदाताओं का विशेष योगदान रहा।

सिरोही। बसंत पंचमी के अबूझ सावे और मां सरस्वती की वंदना के बीच सिरोही की धरा पर सामाजिक समरसता और सादगी का एक नया अध्याय लिखा गया। रोहिड़ा रोड स्थित श्री मारू प्रजापत भीतरोट समाज परगना छात्रावास के प्रांगण में मारू प्रजापत समाज का 13वां भव्य सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित हुआ, जहाँ पारंपरिक रीति-रिवाजों और हर्षोल्लास के बीच आठ जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। यह आयोजन केवल विवाह का उत्सव मात्र नहीं था, बल्कि फिजूलखर्ची को त्याग कर समाज को एक सूत्र में पिरोने का एक सशक्त माध्यम भी बना।
जैसे ही पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार शुरू हुए, पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। अग्नि के समक्ष सात फेरे लेकर नवविवाहित जोड़ों ने अपने नए जीवन की आधारशिला रखी। इस मांगलिक अवसर पर भीलवाड़ा के कोशीथल स्थित सुरभी आश्रम की साध्वी बहुला गोपाल सरस्वती दीदी और श्रीपति नंदनवन धाम के गोविंद वल्लभ महाराज ने विशेष रूप से शिरकत की। संतों के सान्निध्य में जोड़ों ने आशीर्वाद प्राप्त किया, वहीं पिंडवाड़ा-आबू विधायक समाराम गरासिया ने भी समारोह में पहुंचकर नव दंपत्तियों को शुभ आशीष और उपहार भेंट किए।
श्री मारू प्रजापत सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में लोक गीतों और मंगलाचार की गूंज से माहौल जीवंत रहा। मीडिया प्रभारी माधुराम प्रजापत ने इस आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सामूहिक विवाह का मुख्य उद्देश्य समाज से कुरीतियों को मिटाना और आर्थिक बोझ को कम कर भाईचारे को बढ़ावा देना है। उन्होंने भामाशाहों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके उदार कन्यादान और सहयोग ने ही इस पुनीत कार्य को भव्य स्वरूप प्रदान किया।
आयोजन की सफलता में समाज के प्रत्येक वर्ग का समर्पण झलका। समिति के अध्यक्ष छोगालाल कुम्हार वासा और आयोजन समिति ने इस महायज्ञ में आहुति देने वाले दानदाताओं एवं समाजसेवियों का साफा पहनाकर, माला अर्पित कर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। समारोह में समाज के वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं और युवाओं की भारी उपस्थिति ने इस सम्मेलन को एक जन-उत्सव में बदल दिया।
इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में श्री मारू प्रजापत सेवा समिति के अध्यक्ष छोगालाल कुम्हार, पूर्व अध्यक्ष कन्हैयालाल परमार सांतपुर, भेराराम, भगाराम, अचलाराम, सचिव नारायणलाल, कोषाध्यक्ष ताराराम, महामंत्री अमृतलाल, महासचिव व सह कोषाध्यक्ष शंकरलाल, छगन लाल, उपाध्यक्ष इंदरमल, रतिलाल, लच्छीराम, हेमंत टॉक, भोमाराम, रतनलाल, मोहनलाल, शंकरलाल, दिनेश, कैलाश कुमार, गोपालराम, रविशंकर, देवाराम, भेराराम और नरेश सहित पूरी कार्यकारिणी व सहयोगी कमेटियों ने रात-दिन एक कर दिया। वक्ताओं ने अंत में इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायी मिसाल बताया, जो आने वाली पीढ़ियों को एकता और मितव्ययिता का मार्ग दिखाएगी।

Pratahkal Bureau
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