माउंट आबू। राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन और 'राजस्थान के कश्मीर' के नाम से विख्यात माउंट आबू इन दिनों कड़ाके की ठंड की गिरफ्त में है। सर्दी का आलम यह है कि पिछले शुक्रवार से शुरू हुआ शीत लहर का दौर आज सोमवार तक निरंतर जारी है, जिससे जनजीवन पूरी तरह ठिठुर गया है। मौसम के इतिहास में यह संभवतः पहली बार देखा जा रहा है जब माउंट आबू का न्यूनतम तापमान लगातार चार दिनों से जमाव बिंदु (फ्रीजिंग पॉइंट) से 3 डिग्री नीचे स्थिर बना हुआ है। हाड़ कंपाने वाली इस ठंड ने पूरे हिल स्टेशन को सफेद चादर से ढंक दिया है।

सोमवार की सुबह जब पर्यटकों की आँख खुली, तो मंजर किसी बर्फीले रेगिस्तान जैसा प्रतीत हो रहा था। प्रसिद्ध पोलो ग्राउंड के विशाल मैदान में घास के ऊपर बर्फ की मोटी परत जमी नजर आई, तो वहीं आवासीय क्षेत्रों और होटलों के बाहर खड़ी गाड़ियों की छतों और शीशों पर बर्फ की चादर बिछी दिखी। उद्यानों में खिले फूलों और पौधों पर ओस की बूंदें बर्फ के क्रिस्टल बनकर चमक रही थीं। कड़ाके की इस ठंड के बावजूद पर्यटकों के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी जा रही है। गुजरात के सूरत सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में सैलानी इस दुर्लभ नज़ारे का दीदार करने माउंट आबू पहुँच रहे हैं।

सैलानियों के लिए यह अनुभव किसी रोमांच से कम नहीं है। गुजरात से आए पर्यटकों और दिल्ली से आए पर्यटकों ने इस खुशनुमा मौसम पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें माउंट आबू में राजस्थान नहीं, बल्कि कश्मीर और मनाली जैसा अहसास हो रहा है। स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग इस अप्रत्याशित गिरावट पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि जमाव बिंदु से नीचे लगातार गिरता यह तापमान न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी और दैनिक दिनचर्या के लिए भी एक चुनौती पेश कर रहा है। फिलहाल, माउंट आबू का यह सफेद मंजर पर्यटन उद्योग के लिए वरदान साबित हो रहा है, जहाँ हर तरफ केवल बर्फ और रोमांच का माहौल है।

Pratahkal Newsroom

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