माउंट आबू। अरावली की पर्वतमालाओं के बीच बसा राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू इन दिनों पूरी तरह से बर्फ के आगोश में समाया हुआ है। प्रदेश के इस 'कश्मीर' में हाड़ कंपाने वाली सर्दी का सितम लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा, जिससे जनजीवन पूरी तरह जम सा गया है। माउंट आबू शहर का न्यूनतम तापमान आज भी -5 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहा, जिसने बीते कई वर्षों के रिकॉर्ड को चुनौती दे दी है। वहीं, अरावली की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर पर कुदरत का और भी भीषण रूप देखने को मिला, जहां पारा लुढ़क कर -6.2 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा। इस कड़ाके की ठंड ने पूरे इलाके को एक बर्फीले टापू में तब्दील कर दिया है।

सुबह के समय माउंट आबू का प्रसिद्ध पोलो ग्राउंड किसी सफेद मखमली कालीन जैसा नजर आया, जहां ओस की बूंदें और नमी बर्फ की मोटी परत में बदल गई थीं। नजारा इतना दिलचस्प था कि मकर संक्रांति के बाद मैदान में पड़ी पतंगें भी बर्फ में पूरी तरह जम चुकी थीं। प्रकृति के इस अद्भुत और बर्फीले मंजर का लुत्फ उठाने के लिए देश भर से सैलानियों का हुजूम उमड़ पड़ा है। विशेष रूप से पड़ोसी राज्य गुजरात से आए पर्यटकों ने इस हाड़ कंपाने वाली ठंड में भी जबरदस्त उत्साह दिखाया। हमारे संवाददाता ने गुजरात से आए सैलानियों से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि वे माउंट आबू के इस 'मिनी स्विट्जरलैंड' वाले अवतार को देखकर दंग हैं और बर्फ की चादर का आनंद ले रहे हैं।

पर्यटकों की इस भारी आवक ने स्थानीय पर्यटन उद्योग में नई जान फूंक दी है। कड़ाके की सर्दी के बावजूद पर्यटकों का उत्साह और आने वाले वीकेंड की एडवांस बुकिंग को देखते हुए स्थानीय व्यवसायियों के चेहरे खिले हुए हैं। होटल, रेस्टोरेंट और स्थानीय बाजारों में रौनक बढ़ गई है, जिससे यह सप्ताहांत व्यापारिक दृष्टि से काफी लाभदायक रहने की उम्मीद है। हालांकि, प्रशासन ने भी इस कड़ाके की ठंड और जमा देने वाले तापमान को देखते हुए पर्यटकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। माउंट आबू का यह बर्फीला रूप न केवल रोमांच बढ़ा रहा है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि इस बार मरुधरा में सर्दी अपने सबसे तीखे तेवर दिखा रही है।

Sunil Acharya, Mount Abu

Sunil Acharya, Mount Abu

सुनिल आचार्य माउंट आबू से जुड़े प्रमुख रिपोर्टर हैं, जो स्थानीय और राष्ट्रीय समाचारों की विश्वसनीय और सटीक कवरेज के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्रकारिता में तथ्यपरक रिपोर्टिंग और घटनाओं की गहन समीक्षा का विशेष योगदान है। सुनिल आचार्य हर खबर को निष्पक्ष दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं और पाठकों तक सही जानकारी पहुँचाने का पूरा प्रयास करते हैं। उनका लेखन शैली सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को समाचार के हर पहलू से अवगत कराता है।

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