राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने माउंट आबू में निर्माण कार्यों पर लगी रोक हटा दी है। उल्लेखनीय है कि गत 3 मार्च को राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा माउंट आबू के समस्त निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई थी, जिसको लेकर माउंट आबू की जनता को काफी परेशानी उठानी पड़ रही थी।

जनता का संघर्ष और न्यायालय में प्रभावी पैरवी

इस समस्या के समाधान हेतु अबू संगत समिति की एक बैठक रखी गई थी, जिसमें माउंट आबू की एक कमेटी बनाकर चार सदस्यों को राजस्थान उच्च न्यायालय में माउंट आबू की जनता की ओर से पक्ष रखने के लिए अधिकृत किया गया था। आज शुक्रवार को सुनवाई करते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने फैसला दिया कि माउंट आबू पर समस्त प्रकार के निर्माण कार्यों पर लगाई गई रोक हटाई जाती है।

मौलिक अधिकारों और मास्टर प्लान का तर्क

आज आबू की जनता की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय के विद्वान अधिवक्ता देवीक माथुर ने आबू की जनता और सदस्यों की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने न्यायालय में मजबूती से बात रखते हुए कहा कि "इस रोक से माउंट आबू की जनता के लोग अपने मौलिक और संवैधानिक अधिकारों से वंचित हो गए हैं।" अधिवक्ता माथुर ने यह भी तर्क दिया कि "राजस्थान उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद ही माउंट आबू का मास्टर प्लान पास कराया था।" ### आबू की जनता ने ली राहत की सांस

अब डबल बेंच का फैसला माउंट आबू के हित में आने से आबू की जनता ने राहत की सांस ली है और माउंट आबू के लोगों द्वारा न्यायालय के फैसले का स्वागत किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद हमारे संवाददाता ने राजस्थान उच्च न्यायालय में जनता की ओर से पक्ष रखने वाले पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सुनील आचार्य, 16 गांव राजपूत समाज के अध्यक्ष दलपत सिंह दहिया, भंवर सिंह और आबू संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रवीण सिंह परमार से खास बातचीत की।

Pratahkal Bureau

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