माउंट आबू: नक्की झील के तट पर रजत जयंती महोत्सव का भव्य समापन, 90 वर्षीय बुजुर्गों के सम्मान से भावुक हुए श्रद्धालु
माउंट आबू की पावन धरा पर नक्की झील के तट स्थित हनुमान मंदिर और सेतुबंध रामेश्वरम शिव मंदिर के आठ दिवसीय रजत जयंती महोत्सव का भव्य समापन हुआ। महंत डॉ. आचार्य सियाराम दास जी महाराज और कथावाचक मयंक मिश्रा की उपस्थिति में भागवत कथा पूर्ण हुई और 96 वर्षीय घनश्याम आचार्य सहित 90 पार के बुजुर्गों का सम्मान कर सामाजिक समरसता की मिसाल पेश की गई। महायज्ञ और भंडारे के साथ संपन्न हुआ यह दिव्य उत्सव।

माउंट आबू। वशिष्ठ की तपोभूमि और भगवान राम की प्राचीन पाठशाला कहे जाने वाले पावन पर्वतीय स्थल माउंट आबू में आज भक्ति, श्रद्धा और सेवा का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। 33 करोड़ देवी-देवताओं के वास वाली इस धरा पर नक्की झील के दक्षिण तट स्थित हनुमान जी मंदिर, वेद माता गायत्री और सेतुबंध रामेश्वरम शिव मंदिर के आठ दिवसीय रजत जयंती महोत्सव का आज भव्य समापन हुआ। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर शुरू हुए इस महोत्सव ने न केवल धार्मिक अनुष्ठानों की छटा बिखेरी, बल्कि सामाजिक सरोकारों की एक नई मिसाल भी पेश की।
इस ऐतिहासिक समारोह का आगाज आज सुबह 6:15 बजे आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ हुआ। दुनिया के एकमात्र 'राम सर्वेश्वर रघुनाथ मंदिर' के महंत डॉ. आचार्य सियाराम दास जी महाराज के मुख्य आतिथ्य में कार्यक्रम की गरिमा देखते ही बनती थी। कार्यक्रम में हनुमान मंदिर के महंत मुरली दास जी महाराज का सानिध्य और जाने-माने कथावाचक मयंक मिश्रा की अमृतवाणी ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मयंक मिश्रा द्वारा वाचित श्रीमद्भागवत कथा का आज विधिवत समापन हुआ, जिसके साथ ही संपूर्ण परिसर 'राधे-राधे' और 'जय श्री राम' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
महोत्सव का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण वह था, जब आयोजन समिति ने क्षेत्र के 90 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध जनों को सम्मानित करने का निर्णय लिया। मर्यादा और परंपरा का निर्वहन करते हुए महंत डॉ. आचार्य सियाराम दास जी महाराज ने स्वयं मंच से उतरकर 96 वर्षीय बुजुर्ग घनश्याम आचार्य के पास जाकर उन्हें शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उनके साथ ही अन्य 10 वयोवृद्ध जनों का भी इसी प्रकार सम्मान किया गया, जिसने यह संदेश दिया कि सनातन संस्कृति में बुजुर्गों का स्थान सर्वोपरि है।
ज्ञात हो कि इस महोत्सव की जड़ें 14 जनवरी 2001 से जुड़ी हैं, जब नक्की झील के प्रहरी हनुमान जी को नया चोला चढ़ाया गया था और गायत्री माता व सेतुबंध रामेश्वरम शिव मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी। आज 25 वर्षों के इस सफल सफर को 'रजत जयंती' के रूप में मनाते हुए विशाल महायज्ञ और भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें देश के कोने-कोने से आए संतों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि महंत डॉ. आचार्य सियाराम दास जी महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए इस स्थान के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डाला। यह आयोजन माउंट आबू की आध्यात्मिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।

Pratahkal Bureau
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