माउंट आबू: रजत जयंती महोत्सव के तीसरे दिन भक्ति के सागर में डूबा पर्वतीय नगर, कथावाचक मयंक मिश्रा ने समझाया कृष्ण लीलाओं का मर्म
माउंट आबू में दक्षिण तट हनुमान मंदिर के रजत जयंती महोत्सव के तीसरे दिन उमड़ा श्रद्धा का सैलाब। कथावाचक मयंक मिश्रा ने गोवर्धन लीला के माध्यम से जीवन की चुनौतियों पर विजय पाने का दिव्य संदेश दिया। नक्की झील के पास मां जानकी उद्यान में आयोजित इस भव्य समारोह में गुजरात और राजस्थान के हजारों श्रद्धालुओं सहित कई गणमान्य लोगों ने भाग लिया। जानिए इस ऐतिहासिक धार्मिक उत्सव की पूरी रिपोर्ट।

माउंट आबू, 9 जनवरी। अरावली की पर्वत शृंखलाओं के मध्य स्थित मिनी कश्मीर कहे जाने वाले माउंट आबू में इन दिनों श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। स्कंद पुराण में वर्णित विश्व प्रसिद्ध दक्षिण तट हनुमान जी मंदिर, गायत्री माता मंदिर एवं सेतुबंध रामेश्वरम मंदिर के रजत जयंती महोत्सव के तीसरे दिन आज समूचा क्षेत्र भक्तिमय भजनों और भागवत कथा के दिव्य प्रसंगों से गुंजायमान रहा। नक्की झील के समीप स्थित मां जानकी उद्यान में आयोजित इस भव्य समारोह में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक अनुष्ठानों ने एक अलौकिक वातावरण निर्मित कर दिया है।
समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में सुप्रसिद्ध कथावाचक मयंक मिश्रा ने व्यासपीठ से भगवान श्री कृष्ण की अलौकिक लीलाओं का वर्णन करते हुए उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि माउंट आबू की पावन धरा पर 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है और यह वही भूमि है जहाँ वशिष्ठ आश्रम गोमुख में भगवान राम और उनके तीनों भाइयों ने शिक्षा ग्रहण की थी। मिश्रा ने इस बात पर विशेष बल दिया कि माउंट आबू के कण-कण में भगवान राम और हनुमान रचे-बसे हैं, क्योंकि हनुमान जी सदा से प्रभु राम के रक्षक और चौकीदार रहे हैं। इस मंदिर की महत्ता का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में स्कंद पुराण में वर्णित इन विग्रहों को पुनः चोला पहनाया गया था, जिसकी पूर्णता के आज 25 गौरवशाली वर्ष पूरे हो रहे हैं।
कथा के दौरान श्री कृष्ण की 'गोवर्धन लीला' का मार्मिक विवेचन करते हुए मयंक मिश्रा ने जीवन दर्शन के गूढ़ रहस्यों को साझा किया। उन्होंने कहा कि सात वर्ष के कन्हैया द्वारा सात दिनों तक विशाल गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठाना केवल एक चमत्कार नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए एक महान संदेश है। उन्होंने तर्क दिया कि जीवन की समस्याएं भले ही पहाड़ जैसी विशाल क्यों न हों, यदि मनुष्य का आत्मविश्वास डगमगाए नहीं और उसका संकल्प दृढ़ हो, तो वह किसी भी चुनौती को सुगमता से पार कर सकता है। उन्होंने जीव और समस्या के अनुपात का विश्लेषण करते हुए बताया कि जैसे-जैसे व्यक्ति स्वयं को समझने लगता है, चुनौतियां भी उसी रूप में सामने आती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने विशाल पर्वत भी बौने साबित होते हैं।
भक्ति के इस महाकुंभ में ख्यातनाम भजन गायकों ने अपनी स्वर लहरियों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस गौरवशाली उत्सव में माउंट आबू के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ गुजरात और अन्य पड़ोसी राज्यों से आए भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाते हुए बिहारी जी मंदिर के महंत अशोक शर्मा, मुख्य यजमान अशोक वर्मा एवं उनका परिवार, दिनेश बंसल, नथमल बंसल, श्रीमती वीणा चौधरी, रविंद्र अग्रवाल, और महावीर शर्मा सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। महोत्सव का यह भव्य आयोजन न केवल माउंट आबू की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है, बल्कि यह सनातन धर्म की अटूट आस्था और गौरव का प्रतीक बनकर उभरा है।

Pratahkal Bureau
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