माउंंट आबू में गणगौर पर्व की धूम, 16 दिनों तक मां गौरी की विशेष पूजा अर्चना
राजस्थान के माउंट आबू में सुहागिन महिलाएं और युवतियां 16 दिनों तक गणगौर माता की पूजा कर रही हैं, जिसका समापन नक्की झील पर विसर्जन के साथ होगा।

माउंट आबू। राजस्थान के सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक 'गणगौर पर्व' इन दिनों माउंट आबू सहित पूरे प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों में पूरी भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। होली के ठीक बाद शुरू होने वाला यह 16 दिवसीय पारंपरिक उत्सव अपने अंतिम पड़ाव पर है, जहां पिछले 14 दिनों से श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर दिखाई दे रहा है। अलसुबह 6 बजे से लेकर देर रात तक चलने वाले इस पर्व में आस्था और परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, जो राजस्थान की समृद्ध विरासत को जीवंत कर रहा है।
इस पावन पर्व का विशेष महत्व महिलाओं के लिए सर्वोपरि है। जहां विवाहित महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना के साथ मां गणगौर की आराधना कर रही हैं, वहीं विवाह योग्य युवतियां मनवांछित और सुयोग्य वर की प्राप्ति हेतु 16 दिनों तक कठिन नियमों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना में लीन हैं। परंपरा के अनुसार, नवविवाहित महिलाएं शादी के बाद आने वाली पहली गणगौर पर विशेष रूप से मां की उपासना करती हैं। 16 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में सुबह से शाम तक महिलाएं मां गणगौर की सेवा और अनुष्ठानों में व्यस्त रहती हैं।
उत्सव के दौरान घरों में आयोजित होने वाले 'बिंदोरा' कार्यक्रम आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। महिलाएं विभिन्न घरों में एकत्रित होकर पारंपरिक नृत्य करती हैं और मां गणगौर को 'जिमाने' (भोग लगाने) की रस्म अदा की जाती है। लोक गीतों की गूँज और सामूहिक नृत्य के बीच यह पर्व सामाजिक समरसता का उदाहरण पेश कर रहा है। इस उत्सव का समापन एक भव्य शोभायात्रा के साथ होगा, जिसमें मां गणगौर की सवारी निकाली जाएगी और अंततः पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नक्की झील में प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। हमारे संवाददाता ने इस दौरान पूजा कर रही महिलाओं और युवतियों से विशेष बातचीत की, जिसमें उन्होंने इस 16 दिवसीय साधना और अपनी अटूट श्रद्धा को साझा किया।

Sunil Acharya, Mount Abu
सुनिल आचार्य माउंट आबू से जुड़े प्रमुख रिपोर्टर हैं, जो स्थानीय और राष्ट्रीय समाचारों की विश्वसनीय और सटीक कवरेज के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्रकारिता में तथ्यपरक रिपोर्टिंग और घटनाओं की गहन समीक्षा का विशेष योगदान है। सुनिल आचार्य हर खबर को निष्पक्ष दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं और पाठकों तक सही जानकारी पहुँचाने का पूरा प्रयास करते हैं। उनका लेखन शैली सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को समाचार के हर पहलू से अवगत कराता है।
