माउंट आबू। अरावली पर्वतमाला की ऊँचाइयों और दुर्गम इलाकों में बसे गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के उद्देश्य से आंतरिक सुरक्षा अकादमी, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने 27 दिसंबर को एक मानवीय और जनकल्याणकारी पहल को साकार किया। अकादमी की ओर से गुरु शिखर के निकट उत्तरज गांव तथा आबू रोड के पीतारी पादर गांव में दो निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में ग्रामीणों ने लाभ लिया।

इस व्यापक आयोजन का मार्गदर्शन आंतरिक सुरक्षा अकादमी, माउंट आबू के अकादमी निदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक दर्शन लाल गोला के निर्देशन में किया गया। उनके नेतृत्व में सीआरपीएफ के चिकित्सकों और अधिकारियों ने दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाईं। गुरु शिखर से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित उत्तरज गांव, जहाँ सड़क सुविधा तक उपलब्ध नहीं है, वहां यह चिकित्सा शिविर ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम नहीं रहा।

उत्तरज गांव में आयोजित शिविर के दौरान कुल 97 ग्रामवासियों को चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक दवाइयाँ वितरित की गईं। इनमें 28 बच्चे और 47 महिलाएँ शामिल थीं। एमओसीसी 57वीं बैच के 21 डॉक्टरों की टीम ने इस शिविर में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसका नेतृत्व श्री सुधांशु सिंह, डीआईजी ने किया। शिविर के दौरान ग्रामीणों को विभिन्न सामान्य रोगों के उपचार के साथ-साथ स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी बेहतर आदतों के प्रति भी जागरूक किया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने दुर्गम क्षेत्र में पहुँचकर सेवा देने के लिए सीआरपीएफ के प्रयासों की सराहना की।





इसी क्रम में आबू रोड के पीतारी पादर गांव में आयोजित दूसरे चिकित्सा शिविर में भी उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली। यहां 215 ग्रामवासियों को निःशुल्क दवाइयाँ वितरित की गईं, जिनमें 65 बच्चे और 80 महिलाएँ शामिल थीं। इस शिविर में एमओसीसी 57वीं बैच के 23 डॉक्टरों ने अपनी सेवाएँ दीं, जिसका नेतृत्व श्री शिवराज सिंह, डीसी द्वारा किया गया। ग्रामीणों को विशेष रूप से मलेरिया महामारी सहित अन्य मौसमी और संक्रामक बीमारियों की जानकारी दी गई तथा उनसे बचाव के प्रभावी उपायों के बारे में विस्तार से समझाया गया।

इन दोनों चिकित्सा शिविरों के माध्यम से सीआरपीएफ की आंतरिक सुरक्षा अकादमी ने न केवल स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराईं, बल्कि दुर्गम और उपेक्षित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच सुरक्षा बलों के मानवीय चेहरे को भी मजबूती से स्थापित किया। यह पहल यह दर्शाती है कि सीआरपीएफ केवल देश की आंतरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के अंतिम छोर तक सेवा पहुँचाने के अपने दायित्व को भी पूरी निष्ठा से निभा रही है।

Pratahkal Newsroom

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