विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल और देवताओं की तपोभूमि माउंट आबू में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ब्रह्मलीन संत तुलसी गिरी जी महाराज के पावन आशीर्वाद एवं अग्रिश्वर महादेव मंदिर के महंत बाल संत निरंजन गिरी जी महाराज के गरिमामयी सानिध्य में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा एवं विशाल धर्म सम्मेलन का आज अभूतपूर्व उत्साह के साथ समापन हुआ। 1 अप्रैल से प्रारंभ हुए इस धार्मिक अनुष्ठान में देश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिसका भव्य आयोजन मेड़ता सिटी के एडवोकेट रामनारायण जोशी एवं उनके परिवार द्वारा किया गया।

इस आध्यात्मिक महोत्सव के मुख्य वक्ता, प्रख्यात बाल संत कृपाराम जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से भागवत कथा का वाचन कर पांडाल में उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के दौरान भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव, राम-लक्ष्मण-सीता प्रसंग और भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों पर आधारित दिव्य झांकियां व प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। इसी क्रम में सोमवार की रात्रि को सुप्रसिद्ध गायक छोटू सिंह द्वारा दी गई भजनों की प्रस्तुतियों ने भक्ति का ऐसा संचार किया कि हजारों की संख्या में उपस्थित लोग भावविभोर हो उठे।

आयोजन के समापन अवसर पर आयोजित धर्म सम्मेलन को पिंडवाड़ा-आबू विधायक समाराम गरासिया, सुप्रसिद्ध संत लहर गिरी जी महाराज सहित विभिन्न मठों से पधारे महात्माओं और गणमान्य नागरिकों ने संबोधित किया। विधायक समाराम गरासिया ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के वृहद धार्मिक आयोजन हमारी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता को अक्षुण्ण रखने तथा उसे आगे बढ़ाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा माउंट आबू का नाम 'आबू राज' किए जाने का उल्लेख करते हुए हर्ष जताया कि वर्तमान में यहां महाशिवपुराण और भागवत कथा जैसे निरंतर हो रहे आयोजन हमारी धार्मिक जड़ों को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

अंत में, बाल संत निरंजन गिरी जी महाराज ने सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु तुलसी गिरी जी की कृपा से ही यह भव्य आयोजन और विशाल भंडारा निर्विघ्न संपन्न हो सका है। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले मेड़ता सिटी के जोशी परिवार और माउंट आबू की धर्मप्रेमी जनता का आभार व्यक्त किया। यह सात दिवसीय आयोजन न केवल भक्ति का केंद्र रहा, बल्कि इसने क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना को एक नई ऊर्जा प्रदान की।

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