माउंट आबू स्थित आर्ष गुरुकुल महाविद्यालय में आयोजित आर्य समाज का तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन और गुरुकुल का 36वां वार्षिकोत्सव धार्मिक, वैदिक और सांस्कृतिक ऊर्जा के बीच संपन्न हुआ। आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती की तपोभूमि माउंट आबू में आयोजित इस राष्ट्रीय आयोजन में देशभर से आए विद्वानों, प्रतिनिधियों, आर्य वीर दल के पदाधिकारियों, भजनोपदेशकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।

सम्मेलन में केरल और दक्षिण भारत सहित विभिन्न प्रांतों से आए प्रदेश अध्यक्ष, प्रतिनिधि, राजनेता, विद्वान और भजन गायक शामिल हुए। तीन दिवसीय कार्यक्रमों में 1000 से अधिक लोगों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में आर्य समाज राष्ट्रीय सर्वदेशिक वीर दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी देवदत्त सरस्वती विशेष रूप से उपस्थित रहे। समापन कार्यक्रम माउंट आबू के स्वामी ओमानंद सरस्वती की उपस्थिति और संचालन में संपन्न हुआ।

प्रातःकालीन यज्ञ में वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ आहुतियां प्रदान की गईं। प्रवचन सत्र में गुरुकुल मुजफ्फरनगर के आचार्य योगेश भारद्वाज ने ऋषि कृत उपनिषद ग्रंथों के माध्यम से वर्तमान शिक्षा प्रणाली के शुद्धिकरण पर बल दिया। उन्होंने वैदिक शिक्षा पद्धति को युवा पीढ़ी के नैतिक और बौद्धिक विकास के लिए आवश्यक बताया।

गुरुकुल आबूपर्वत द्वारा पिछले तीन वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आर्य विद्वानों के सम्मान प्रकल्प के तहत आर्य परिवार शिवगंज ने स्वर्गीय श्री भीष्मदेव वानप्रस्थी और उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती ओटीबाई की पुण्य स्मृति में स्वामी देवव्रत सरस्वती तथा भरतपुर के वरिष्ठ भजनोपदेशक पंडित नरदेव आर्य का सम्मान किया।

स्वर्गीय श्री रामकिशन चुग्ध एवं स्वर्गीय चन्द्रकान्ता चुग्ध की पुण्य स्मृति में सूरजप्रकाश चुग्ध के सौजन्य से बिजनौर के भजनोपदेशक पंडित योगेशदत्त आर्य को विद्वत् पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं भगवानीदेवी चुग्ध और उनके जामाता स्वर्गीय श्री सुभाष वर्मानी की स्मृति में परिवार द्वारा मथुरा की सविता शास्त्री को विद्वत् पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

आर्य परिवार शिवगंज की ओर से दो गुरुकुल संचालकों का विशेष अभिनंदन भी किया गया। देहरादून और हैदराबाद के गुरुकुल संचालक आचार्य डॉ. धनञ्जय आर्य तथा केरल के आचार्य के. एम. राजन मीमांसक का सम्मान समारोह में अभिनंदन किया गया। गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने घोषवादन के साथ अतिथियों का स्वागत किया। सम्मान समारोह में तिलक, माल्यार्पण, वेद मंत्रों के साथ उपवस्त्र, आर्ष साहित्य, प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार राशि भेंट की गई। कार्यक्रम का संचालन गुरुकुल ट्रस्ट के मंत्री प्रोफेसर कमलेश कुमार शास्त्री ने किया।

सम्मानित विद्वानों ने अपने संबोधन में वर्तमान युवा पीढ़ी के सर्वांगीण विकास में गुरुकुल शिक्षा और आर्य वीर दल की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम के दौरान व्यायाम शिक्षक आचार्य सत्यम् आर्य और सुनील आर्य के निर्देशन में प्रशिक्षित ब्रह्मचारियों ने भव्य व्यायाम प्रदर्शन प्रस्तुत किया। संचलन, सर्वांग सुंदर व्यायाम, नियुद्धम्, सूर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार, चन्द्र नमस्कार, दण्ड-बैठक, योगासन, पिरामिड, लाठी, भाला, तलवार, दान पट्टा, कलरी, डम्बल्स, लेजियम, मल्लखम्भ और रस्से पर आसनों की रोमांचक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन आर्य वीर दल राजस्थान के मंत्री गगेन्द्र शास्त्री ने किया।

गुरुकुल के संचालक स्वामी ओमानन्द सरस्वती ने आगामी नवीन प्रकल्प “स्वामी धर्मानन्द विद्यापीठ” की विस्तृत जानकारी दी। वहीं आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान की बैठक में स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती के बलिदान शताब्दी वर्ष के आयोजन और योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ने वैदिक शिक्षा, संस्कार, शारीरिक प्रशिक्षण और आर्य समाज की संगठनात्मक शक्ति का व्यापक संदेश दिया। माउंट आबू की तपोभूमि पर आयोजित यह आयोजन आर्य समाज के वैचारिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विस्तार का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा।

Pratahkal Bureau

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