माउंट आबू। अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित देश की प्रतिष्ठित आंतरिक सुरक्षा अकादमी (ISA) में आज शौर्य और सेवा का एक नया अध्याय लिखा गया। देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 57वें बैच के 44 मेडिकल अधिकारियों ने 17 सप्ताह के अपने कठोर परिश्रम और सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण कर सहायक कमांडेंट के रूप में राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया। माउंट आबू के ऐतिहासिक सीआरपीएफ परेड ग्राउंड में आयोजित इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह ने न केवल इन जांबाज अधिकारियों के जज्बे को प्रदर्शित किया, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए अब ये चिकित्सा विशेषज्ञ 'वर्दी वाले योद्धा' के रूप में तैयार हैं।

समारोह का मुख्य आकर्षण वह पल रहा जब परेड की सलामी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और आंतरिक सुरक्षा अकादमी के निदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक दर्शन सिंह गोला ने ली। कदम से कदम मिलाते इन युवा अधिकारियों की टोली में नारी शक्ति का दबदबा भी साफ नजर आया, जहाँ 18 महिला अधिकारियों ने 26 पुरुष अधिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी ट्रेनिंग पूरी की। 17 सप्ताह के इस चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण के दौरान इन चिकित्सकों को न केवल सैन्य कौशल सिखाया गया, बल्कि उन्हें कठिन परिस्थितियों में नेतृत्व करने और आंतरिक सुरक्षा की पेचीदगियों को समझने के लिए भी तैयार किया गया।

इस दीक्षांत समारोह के दौरान प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया गया। 'ऑल राउंड चैंपियनशिप' का प्रतिष्ठित खिताब डॉक्टर अश्वत्थि रमेश ने अपने नाम कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वहीं, अकादमिक उत्कृष्टता के लिए 'बेस्ट इनडोर' का खिताब वसुंधरा गोस्वामी को दिया गया, जबकि शारीरिक और रणनीतिक कौशल में 'बेस्ट आउटडोर' का पुरस्कार डॉक्टर जीशन फुकन ने प्राप्त किया। परेड का नेतृत्व और अनुशासन देख वहां मौजूद देश के कोने-कोने से आए पुलिस उपमहानिरीक्षक, वरिष्ठ अधिकारी और अभिभावक भावविभोर हो उठे।

कार्यक्रम के औपचारिक पक्ष को आगे बढ़ाते हुए अकादमी के उपनिदेशक एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक शिवकुमार ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया। इसके पश्चात, उपनिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक सुधांशु सिंह ने सभी 44 नव-नियुक्त सहायक कमांडेंट को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। अंत में उन्होंने सभी का आभार व्यक्त करते हुए इन अधिकारियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह दीक्षांत समारोह केवल एक प्रशिक्षण की समाप्ति नहीं, बल्कि उन रक्षकों की शुरुआत है जो सीमा से लेकर सुदूर जंगलों तक सीआरपीएफ के जवानों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की ढाल बनेंगे।

Pratahkal Bureau

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