सिरोही। माधव विश्वविद्यालय में हेल्थ साइंस लाइब्रेरी के संयुक्त तत्वावधान में “विकसित भारत–2047” के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों के विकास हेतु पुस्तकालयों के डिजिटलीकरण एवं पुनर्संरचना जैसे समसामयिक विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. हिम्मत सिंह देवल एवं प्रेसिडेंट डॉ. राजीव माथुर के मार्गदर्शन में किया गया।

स्वागत एवं संगोष्ठी का परिचय

कार्यक्रम के प्रथम दिन संगोष्ठी के आयोजक डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने देशभर से पधारे विद्वान पुस्तकालयाध्यक्षों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। अपने स्वागत उद्बोधन में उन्होंने कहा कि:

"विकसित भारत–2047 के संकल्प को साकार करने में आधुनिक, डिजिटल एवं पुनर्संरचित पुस्तकालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर स्वास्थ्य विज्ञान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में।"

उद्घाटन सत्र में प्रेसिडेंट डॉ. राजीव माथुर ने संगोष्ठी का परिचय देते हुए कहा कि डिजिटल युग में पुस्तकालय केवल ज्ञान-संग्रह के केंद्र नहीं रहे, बल्कि नवाचार, अनुसंधान और नीति-निर्माण के सशक्त माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने हेल्थ साइंस लाइब्रेरी को विकसित भारत की परिकल्पना से जोड़ते हुए उसके दीर्घकालिक महत्व पर प्रकाश डाला।

डिजिटल पुस्तकालयों की भूमिका और मुख्य व्याख्यान

लाइब्रेरी साइंस के संयुक्त सचिव डॉ. राजेश त्रिवेदी ने हेल्थ साइंस लाइब्रेरी की स्थापना, उद्देश्यों तथा कोर कमेटी की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि:

"गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य शिक्षा और शोध के लिए अद्यतन डिजिटल संसाधनों से युक्त पुस्तकालय अनिवार्य हैं।"

दिल्ली विश्वविद्यालय से पधारे की-नोट स्पीकर डॉ. आर. के. भट्ट ने पुस्तकालयों के डिजिटलीकरण, पुनर्संरचना तथा “विकसित भारत–2047” के संदर्भ में उनके महत्व पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया, जिसे श्रोताओं ने विशेष सराहना दी।

सम्मान एवं पुस्तक विमोचन

इस अवसर पर शिक्षा एवं अकादमिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रोफेसर उमेश कुमार शर्मा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही संगोष्ठी के विषय से संबंधित एक संपादित पुस्तक का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया। अंत में अकादमिक अधिष्ठाता डॉ. महेंद्र सिंह ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

तकनीकी सत्र एवं शोध प्रस्तुति

प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर अतुल भट्टा एवं प्रोफेसर आदित्यनाथ त्रिपाठी ने की, जबकि द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. डी. के. शर्मा, डॉ. योगेश पारिख एवं डॉ. सी. के. पटेल ने की। दोनों सत्रों में अनेक पत्र-वाचकों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत कर विषय पर सारगर्भित विमर्श किया।

गरिमामयी उपस्थिति एवं प्रबंधन

कार्यक्रम में निम्नलिखित पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे:

  • प्रो–प्रेसिडेंट डॉ. सुशील भार्गव
  • रजिस्ट्रार डॉ. भावेश कुमावत
  • रिसर्च डायरेक्टर डॉ. पवन कुमार
  • छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. देवेंद्र मुझाल्दा
  • विभिन्न संकाय सदस्य व छात्र-छात्राएं

मंच संचालन में डॉ. रूचि ठाकर और डॉ. मार्मिक प्रजापति का योगदान रहा, साथ ही टीवीटीसीसी कमेटी व शोधार्थी अशोक कुमार ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, पुस्तकालय विज्ञान विशेषज्ञ, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Pratahkal Newsroom

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