सरूपगंज। माधव विश्वविद्यालय के माधव होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में “राष्ट्रीय होम्योपैथिक कॉन्फ्रेंस 2025” का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस वर्ष सम्मेलन की थीम “प्राकृतिक उपचार में होम्योपैथी की भूमिका : विज्ञान और संवेदना का संगम” रही, जिसने चिकित्सा के वैज्ञानिक और मानवीय पहलुओं को जोड़ते हुए नए दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. राजकुमार, चांसलर हिम्मत सिंह देवल, रजिस्ट्रार डॉ. भावेश कुमावत, होम्योपैथिक विभाग की निदेशक डॉ. भारती देसाई तथा कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. विजय प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर और होम्योपैथी के जनक डॉ. सैमुअल हैनीमैन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ होम्योपैथी, केकड़ी के प्रधानाचार्य डॉ. पुनीत शाह, नूतन होम्योपैथिक कॉलेज, गुजरात के डॉ. नीरव भट्ट, गोकुल होम्योपैथिक कॉलेज की डॉ. तिलोत्तमा ग्लैंड, नूतन होम्योपैथिक कॉलेज, गुजरात के डॉ. राजीव रूही एवं डॉ. विक्रांत सक्सेना सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

सम्मेलन में एसबीएल कंपनी ने विशेष सहयोग प्रदान किया, जिसने कार्यक्रम के सफल संचालन और वैज्ञानिक सत्रों के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देशभर से आए प्रतिष्ठित होम्योपैथिक चिकित्सक, शिक्षाविद, शोधकर्ता और विद्यार्थी सम्मेलन में बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने प्राकृतिक उपचार में होम्योपैथी की भूमिका पर अपने अनुभव, शोध एवं नवीन दृष्टिकोण साझा किए।

मुख्य अतिथि डॉ. पुनीत शाह ने कहा कि होम्योपैथी केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य संतुलन को पुनर्स्थापित करने में सहायक है। कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. विजय प्रताप सिंह ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में मनुष्य का प्रकृति से जुड़ाव कम हो रहा है, और ऐसे समय में होम्योपैथी मानवता को पुनः प्रकृति की गोद में ले जाने का कार्य कर रही है।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न वैज्ञानिक सत्र, पेपर प्रेजेंटेशन, पोस्टर प्रतियोगिता और इंटरएक्टिव वर्कशॉप आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने प्राकृतिक उपचार, मानसिक स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा प्रणाली और दीर्घकालिक बीमारियों में होम्योपैथी की भूमिका पर अपने शोध प्रस्तुत किए। डॉ. अभिजीत गिरी, डॉ. भानु प्रताप सिंह, डॉ. अमित कुमार, डॉ. राजश्री जांगिड़, डॉ. मोनिका पी., डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. दीपांशु बच्चल, डॉ. रोहन शर्मा और डॉ. निपुण सिंह ने सक्रिय योगदान दिया।

सांस्कृतिक सत्र में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत, लघु नाटिका और समूह नृत्य ने “प्राकृतिक चिकित्सा में होम्योपैथी की भूमिका” को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। सम्मेलन के समापन अवसर पर डॉ. विजय प्रताप सिंह ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सम्मेलन विद्यार्थियों को चिकित्सा के साथ-साथ मानव और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रेरणा देगा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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