सिरोही के गणेश देवासी पैरों से तीरंदाजी कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं
2016 में दोनों हाथ गंवाने के बाद गणेश देवासी ने पैरों से तीरंदाजी सीखी; माउंट आबू शिविर में राज्य स्तरीय गोल्ड मेडल विजेता का प्रदर्शन।

सिरोही के गणेश देवासी माउंट आबू के 21 दिवसीय केंद्रीय खेलकूद शिविर में पैरों से धनुष-बाण साधते हुए; 2016 में दोनों हाथ खोने के बाद उन्होंने राज्य स्तर पर गोल्ड मेडल जीता है।
अगर हौसले मजबूत हों तो शारीरिक सीमाएँ भी सफलता की राह नहीं रोक पातीं—इस सच्चाई को राजस्थान के सिरोही जिले के युवा गणेश देवासी ने अपने संघर्ष और उपलब्धियों से साबित कर दिया है। माउंट आबू में आयोजित 21 दिवसीय केंद्रीय खेलकूद प्रशिक्षण शिविर में गणेश देवासी विशेष रूप से अपने पैरों की मदद से तीरंदाजी का अभ्यास कर रहे हैं, जो उपस्थित सभी के लिए प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।
गणेश देवासी वर्ष 2016 में एक भीषण हादसे का शिकार हुए थे, जिसमें उन्होंने अपने दोनों हाथ खो दिए। इस कठिन परिस्थिति के बावजूद उन्होंने जीवन से हार नहीं मानी और अपने पैरों को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। समय के साथ उन्होंने पैरों की सहायता से न केवल दैनिक कार्यों में दक्षता हासिल की, बल्कि कैरम खेल, पेंटिंग और तीरंदाजी जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।
तीरंदाजी जैसे सटीकता और नियंत्रण वाले खेल में पैरों से लक्ष्य साधना अपने आप में असाधारण उपलब्धि मानी जा रही है। गणेश देवासी ने इस क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल भी प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
शिविर निदेशक अशोक चौधरी ने जानकारी दी कि गणेश देवासी दोनों हाथ न होने के बावजूद पैरों की सहायता से तीरंदाजी का अभ्यास कर रहे हैं और प्रतियोगिता मानकों के अनुरूप प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं। सिरोही के सांसद लुंबाराम, जिला प्रशासन तथा खेल विभाग भी उनके प्रशिक्षण और विकास में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
प्रशासन की ओर से यह भी प्रयास किया जा रहा है कि तीरंदाजी से जुड़े महंगे उपकरणों की व्यवस्था कर गणेश देवासी को बेहतर प्रशिक्षण और उच्च स्तर तक पहुंचने का अवसर प्रदान किया जाए।
गणेश देवासी की यह कहानी उन सभी के लिए प्रेरणास्रोत बनकर सामने आई है, जो विपरीत परिस्थितियों को अपनी कमजोरी मान लेते हैं, जबकि उनका जीवन यह संदेश देता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से हर बाधा को अवसर में बदला जा सकता है।

Pratahkal Bureau
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