आबूराज के ओंकार आश्रम में ब्रह्मलीन श्री तुलसी गिरी जी महाराज की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, जनसंख्या नियंत्रण कानून की उठी मांग
आबूराज के ओंकार आश्रम में श्री तुलसी गिरी जी महाराज की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में विश्व जनसंख्या दिवस पर जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग भी उठी।

तस्वीर में देलवाडा स्थित आश्रम परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंच पर बैठे साधु-संत और उनके समक्ष उपस्थित श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।
देलवाडा स्थित ओंकार आश्रम में श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन श्री तुलसी गिरी जी महाराज अंतरराष्ट्रीय संत की पुण्यतिथि श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पूजा-अर्चना, भक्ति, भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। आबू राज के संतों एवं महंत श्री निरंजन गिरी जी महाराज ने भक्तों के साथ मिलकर गुरुजी की स्तुति प्रस्तुत की। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि गुरुजी की इच्छा के अनुरूप भविष्य में यहां एक चिकित्सालय का निर्माण किया जाएगा, जहां साधु-संतों एवं स्थानीय लोगों को उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
कार्यक्रम में उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए भारत रक्षा मंच के जिला अध्यक्ष श्री प्रकाश चौहान ने विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर भारत में बढ़ती जनसंख्या को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एक समुदाय विशेष की जनसंख्या बढ़ने से संबंधित क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी बदल जाती है तथा सनातनी धर्म के लोगों की संख्या कम हो रही है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या बढ़ने के कारणों में एक व्यक्ति द्वारा तीन-चार शादियां करके दर्जनों बच्चे पैदा करना, पड़ोसी देशों से घुसपैठ के माध्यम से लाखों दूसरे देशों के लोगों का भारत की सीमा में प्रवेश कर स्थायी निवास करना, लव जिहाद जैसी सामाजिक बुराइयों के माध्यम से अनेक हिंदू लड़कियों से बच्चे पैदा करना तथा मजहब की आड़ लेकर नसबंदी या परिवार नियोजन के साधन नहीं अपनाना जैसे कारण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारत की जनसंख्या करीब 150 करोड़ हो रही है।
उन्होंने कहा कि जनसंख्या बढ़ने से बसों और रेलों में यात्रा करना तथा बाजारों और सड़कों पर पैदल चलना भी मुश्किल होता जा रहा है। कई शहरों में ट्रैफिक घंटों तक जाम रहता है। उनके अनुसार बढ़ती जनसंख्या के साथ बेरोजगारी भी बढ़ रही है और बेरोजगार लोग चोरी, लूट, बलात्कार, सरकारी जमीनों, मंदिरों की खाली पड़ी जमीनों तथा मुख्य मार्गों पर अवैध कब्जा कर यातायात को बाधित करते हैं और प्रदूषण बढ़ाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज भी कई शहरों में सड़क किनारे और रेल की पटरियों के पास खुले में शौच तथा कचरा फैलाने जैसी स्थितियां देखने को मिलती हैं।
श्री प्रकाश चौहान ने कहा कि जनसंख्या बढ़ने से भुखमरी की समस्या भी बढ़ती है, जिसके कारण पर्याप्त सब्जियां, फल, अनाज और अन्य खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि भूख की स्थिति में लोग पेड़-पौधों को काटते हैं, लकड़ी जलाते हैं तथा जंगली जानवरों, सड़क पर घूमती गाय, भैंस, भेड़, बकरी, तीतर, बटेर, मुर्गा, कबूतर सहित जो भी पशु-पक्षी आसानी से मिल जाएं, उन्हें चोरी-छिपे काटकर खा जाते हैं। उन्होंने कहा कि आदमियों की बढ़ती जनसंख्या और पशु-पक्षियों की घटती संख्या के कारण प्रकृति, पर्यावरण और ईको सिस्टम असंतुलित हो रहा है, जिससे प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं तथा पृथ्वी का प्रलय भी हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मांसाहार खाने से तामसिक प्रवृत्ति, हिंसा, बलात्कार, पेट में कीड़े तथा शरीर में कैंसर जैसे रोग पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के लिए सरकार से कठोर कानून लाने की मांग करते हुए कहा कि एक से अधिक शादियों पर रोक लगाई जाए, दो से अधिक बच्चे पैदा करने पर प्रतिबंध लगाया जाए तथा लव जिहाद जैसी सामाजिक बुराइयों पर कड़ाई से रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली टेक्निकल शिक्षा, सरकारी नौकरियों और सरकारी योजनाओं का लाभ कम बच्चे वाले परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाए। साथ ही परिवार नियोजन के साधनों को अपनाने और नसबंदी जैसे कार्यक्रमों का कठोरता से पालन करने पर ही जनसंख्या को नियंत्रित किया जा सकता है तथा पूरे विश्व में शांति और व्यवस्था कायम हो सकती है। कार्यक्रम के अंत में सभी भक्तों ने प्रेमपूर्वक भगवान का शुद्ध, ताजा और सात्विक प्रसाद ग्रहण किया।

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