आबू रोड। अध्यात्म और समाज सेवा के वैश्विक केंद्र, ब्रह्माकुमारीज संस्थान ने अपने गौरवशाली 90 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मानवता और प्रकृति के संरक्षण हेतु एक युगांतरकारी निर्णय लिया है। संस्थान की अंतरराष्ट्रीय कार्यकारिणी की उच्च स्तरीय बैठक में इस वर्ष देशभर में 90 लाख पौधे लगाने का महा-लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अभियान केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संस्थान ने इन पौधों के पूर्ण संरक्षण और सार-संभाल की जिम्मेदारी भी स्वीकार की है, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस महत्वपूर्ण बैठक में केवल प्रकृति ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की रीढ़ कहे जाने वाले किसानों के सर्वांगीण उत्थान पर भी गहन मंथन किया गया। संस्थान ने पराली निस्तारण की समस्या के समाधान के लिए एक प्रभावी पहल की घोषणा की है, जो न केवल प्रदूषण कम करने में सहायक होगी बल्कि कृषि पारिस्थितिकी को भी मजबूती प्रदान करेगी। इसके साथ ही 'गोकुल ग्राम' की संकल्पना और 'शाश्वत जैविक यौगिक खेती' के माध्यम से गांवों को पुनः आत्मनिर्भर बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई है। ग्रामीण स्तर पर व्याप्त कुरीतियों के उन्मूलन और नशामुक्ति के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त करने का संकल्प लिया गया है।

संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मोहिनी दीदी ने बैठक को संबोधित करते हुए विश्वास जताया कि इन प्रकल्पों से ग्रामीण परिवेश के उन्नयन और सामाजिक सुधार के नए द्वार खुलेंगे। उन्होंने विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए एक समर्पित टीम के गठन की घोषणा की, जो राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देगी। इसी क्रम में युवाओं के बीच बढ़ते डिजिटल एडिक्शन को देखते हुए 'डिजिटल वेलनेस' अभियान के तहत स्कूल-कॉलेजों में विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।

संस्थान ने अपनी दूरदर्शी सोच को विस्तार देते हुए पांच नए प्रभागों के गठन का भी ऐतिहासिक ऐलान किया है। इनमें दिव्यांग जन सेवा प्रभाग, वित्त व्यवसायी प्रभाग, डिजाइन एवं इनोवेशन प्रभाग तथा विश्वकर्मा प्रभाग शामिल हैं। इन प्रभागों का उद्देश्य समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों और हुनरमंदों को आध्यात्मिक शक्ति से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाना है। आबू रोड की इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान आने वाले दशकों में न केवल आध्यात्मिक शांति, बल्कि एक हरित और व्यसनमुक्त भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने जा रहा है।

Sunil Acharya, Mount Abu

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सुनिल आचार्य माउंट आबू से जुड़े प्रमुख रिपोर्टर हैं, जो स्थानीय और राष्ट्रीय समाचारों की विश्वसनीय और सटीक कवरेज के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्रकारिता में तथ्यपरक रिपोर्टिंग और घटनाओं की गहन समीक्षा का विशेष योगदान है। सुनिल आचार्य हर खबर को निष्पक्ष दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं और पाठकों तक सही जानकारी पहुँचाने का पूरा प्रयास करते हैं। उनका लेखन शैली सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को समाचार के हर पहलू से अवगत कराता है।

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