माउंट आबू में हाड़ कंपाने वाली ठंड: लगातार छठे दिन जमाव बिंदु से नीचे रहा पारा, राजस्थान के 'कश्मीर' में बर्फ की सफेद चादर के बीच पर्यटकों का जमावड़ा
राजस्थान के कश्मीर माउंट आबू में कुदरत का कहर और खूबसूरती एक साथ देखने को मिल रही है। लगातार छठे दिन तापमान -2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचने से जनजीवन जम गया है। जहां पर्यटकों की भारी भीड़ इस बर्फीले मंजर का आनंद ले रही है, वहीं कड़ाके की ठंड के कारण माउंट आबू के अंग्रेजी माध्यम के स्कूल 15 फरवरी तक बंद कर दिए गए हैं। उत्तर भारत की शीतलहर के बीच राजस्थान के इस हिल स्टेशन की पूरी विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

माउंट आबू। राजस्थान का इकलौता पर्वतीय स्थल माउंट आबू इन दिनों भीषण शीतलहर और कड़ाके की ठंड की चपेट में है। उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं ने 'राजस्थान के कश्मीर' कहे जाने वाले इस पर्यटन स्थल को पूरी तरह से अपनी आगोश में ले लिया है। आलम यह है कि लगातार छठे दिन भी यहां का न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु से नीचे दर्ज किया गया, जिससे जनजीवन और दिनचर्या पर व्यापक असर पड़ा है। मंगलवार को भी तापमान -2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो इस सीजन की सबसे भीषण ठंड की तस्दीक करता है। माउंट आबू के इतिहास में संभवतः यह पहली बार है जब तापमान लगातार इतने लंबे समय तक शून्य से नीचे बना हुआ है।
प्रकृति के इस रौद्र लेकिन खूबसूरत रूप को देखने के लिए पर्यटकों का सैलाब उमड़ पड़ा है। गुजरात सहित देश के विभिन्न राज्यों से सैलानी माउंट आबू के इस हसीन बर्फीले मंजर का लुत्फ उठाने पहुंच रहे हैं। मैदानों और नक्की झील के किनारों पर जमी बर्फ की परत पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। हालांकि, कड़ाके की इस ठंड ने स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग को भी कड़े कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। शीतलहर के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए प्रदेश के कई जिलों में पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए अवकाश घोषित कर दिया गया है। वहीं, माउंट आबू के सभी अंग्रेजी माध्यम के स्कूल, जो दिसंबर माह में ही बंद हो गए थे, अब आगामी 15 फरवरी तक बंद रहेंगे। सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ियों में भी बढ़ती ठंड को देखते हुए छोटे बच्चों की छुट्टियां किए जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
पूरे उत्तर भारत में जारी शीतलहर का सबसे गहरा असर माउंट आबू की वादियों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। जहां एक ओर यह कड़ाके की ठंड आम जनजीवन के लिए चुनौती बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर पर्यटन उद्योग के लिए यह एक 'गोल्डन सीजन' साबित हो रहा है। स्थानीय लोग अलाव जलाकर खुद को ठंड से बचाने का जतन कर रहे हैं, तो सैलानी इस दुर्लभ मौसमी घटना को अपने कैमरों में कैद करने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं। माउंट आबू का यह बर्फीला स्वरूप न केवल प्रदेश की विविधता को दर्शाता है, बल्कि इस कड़ाके की सर्दी में भी पर्यटन की नई संभावनाओं को जन्म दे रहा है।

Pratahkal Bureau
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