डॉ. बिशाल भट्टाचार्य की पुस्तक 'गांधी और फैनन' का माधव विश्वविद्यालय में विमोचन
राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक डॉ. बिशाल भट्टाचार्य ने गांधी और फैनन के राष्ट्रवाद पर शोधपरक अध्ययन प्रस्तुत किया है, जिसका विमोचन विश्वविद्यालय के चेयरमैन ने किया।

सिरोही स्थित माधव विश्वविद्यालय में डॉ. बिशाल भट्टाचार्य की पुस्तक का विमोचन करते विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. राजकुमार (बाएं) और लेखक डॉ. बिशाल भट्टाचार्य (दाएं)।
सिरोही। शैक्षणिक जगत और बौद्धिक विमर्श के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए माधव विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत डॉ. बिशाल भट्टाचार्य की नवीनतम अकादमिक पुस्तक “गांधी और फैनन के राष्ट्रवाद एवं संस्कृति पर तुलनात्मक विश्लेषण” का भव्य प्रकाशन हुआ है। यह कृति राष्ट्रवाद, संस्कृति और उपनिवेशोत्तर विचारधारा के जटिल आयामों पर केंद्रित एक अत्यंत गंभीर, मौलिक एवं शोधपरक अध्ययन प्रस्तुत करती है जो समकालीन राजनीति विज्ञान की समझ को नई गहराई प्रदान करती है।
प्रस्तुत पुस्तक में विश्व के दो महानतम चिंतकों—महात्मा गांधी और फ्रांत्ज़ फैनन—के राष्ट्रवाद, संस्कृति, हिंसा, नैतिकता तथा मुक्ति संबंधी मौलिक विचारों का गहन और सूक्ष्म तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। लेखक डॉ. बिशाल भट्टाचार्य ने दोनों विचारकों के भिन्न दृष्टिकोणों को व्यापक राजनीतिक एवं सामाजिक संदर्भों में पिरोते हुए यह स्पष्ट करने का सफल प्रयास किया है कि किस प्रकार उनके सिद्धांत उपनिवेशवाद के विरुद्ध ऐतिहासिक संघर्ष को नई दिशा प्रदान करते हैं और सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनते हैं।
इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्य के औपचारिक लोकार्पण हेतु आयोजित समारोह में विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. राजकुमार, रजिस्ट्रार डॉ. भावेश कुमावत, होम्योपैथिक विभाग की निदेशक डॉ. भारती देसाई एवं अकादमिक अधिष्ठाता डॉ. महेंद्र सिंह परमार ने संयुक्त रूप से पुस्तक का विमोचन किया। वक्ताओं ने इस दौरान डॉ. भट्टाचार्य के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे शोध के क्षेत्र में एक मानक स्थापित करने वाली कृति बताया।
यह पुस्तक विशेष रूप से भारतीय और अफ्रीकी-कैरिबियन बौद्धिक परंपराओं के मध्य एक वैचारिक सेतु का निर्माण करती है। यह पहचान की खोज, सांस्कृतिक राजनीति और उपनिवेशवाद से पूर्ण मुक्ति जैसे ज्वलंत समकालीन मुद्दों पर एक सारगर्भित विमर्श प्रस्तुत करती है। निश्चित रूप से, स्नातक (बीए), स्नातकोत्तर (एमए) और शोधार्थियों के साथ-साथ राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र एवं मानविकी विषयों के जिज्ञासु विद्यार्थियों के लिए यह पुस्तक संदर्भ ग्रंथ के रूप में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। माधव विश्वविद्यालय परिवार ने डॉ. बिशाल भट्टाचार्य की इस गौरवशाली उपलब्धि पर उन्हें हार्दिक बधाई प्रेषित की है और उनके उज्ज्वल एवं समृद्ध शैक्षणिक भविष्य की मंगलकामना की है।

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