बच्चों के सर्वांगीण विकास और कुपोषण उन्मूलन की दिशा में एक सशक्त कदम उठाते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग, ब्यावर द्वारा गुरुवार को 'अष्टम पोषण पखवाड़े' का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस विशेष अवसर पर अजमेरी गेट से लेकर डाकघर एवं भगत चौराहे तक एक भव्य जागरूकता रैली निकाली गई, जिसने शहर के मुख्य मार्गों पर पोषण संदेशों की अलख जगाई। रैली के दौरान प्रतिभागियों ने जोश और उत्साह के साथ “कुपोषण मुक्त भारत” एवं मातृ व बाल पोषण से संबंधित प्रभावशाली नारे लगाकर आमजन को स्वस्थ जीवन शैली और बेहतर पोषण के प्रति जागरूक किया।

विभागीय स्तर पर इस वर्ष अष्टम पोषण पखवाड़ा की थीम “जीवन के पहले 6 वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना” निर्धारित की गई है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य का मुख्य उद्देश्य प्रारंभिक बाल्यावस्था, विशेषकर जीवन के प्रथम 1000 दिनों के भीतर उचित पोषण, संवेदनशील देखभाल और खेल-आधारित शिक्षा के समन्वय से बच्चों के संज्ञानात्मक एवं शारीरिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। रैली के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग की समर्पित कार्यकर्ताओं ने नागरिकों को पोषण के सूक्ष्म महत्व और कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से बचाव के प्रभावी उपायों के बारे में विस्तार से अवगत कराया।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, ब्यावर श्रीमती नीरू सांखला ने हरी झंडी दिखाकर किया। समारोह के दौरान बाल विकास परियोजना अधिकारी श्री नितेश यादव, महिला पर्यवेक्षक श्रीमती चंद्रकांता जोशी, श्रीमती बर्फी मीना एवं सुश्री सरिता मीना सहित विभाग के विभिन्न कार्मिक और गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। अधिकारियों ने इस पखवाड़े की प्रासंगिकता पर बल देते हुए स्पष्ट किया कि बचपन की मजबूत नींव ही एक स्वस्थ राष्ट्र का आधार बनती है, और इस पखवाड़े के माध्यम से जन-जन तक यह संदेश पहुँचाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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