आबू रोड। न्यायिक जगत में सत्य की प्रतिष्ठा और मन की शांति ही वह आधारस्तंभ हैं, जिन पर जनमानस का विश्वास टिका होता है। ब्रह्माकुमारीज संस्थान के मनमोहिनीवन स्थित ग्लोबल ऑडिटोरियम में आयोजित एक भव्य गरिमामय समारोह में 'आत्मा के नियम: मूल्यनिष्ठ न्यायिक प्रक्रिया' विषय पर राष्ट्रीय स्तर के अभियान का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में सिरोही और जालोर जिलों के विधि विशेषज्ञों एवं अधिवक्ताओं ने बड़ी संख्या में शिरकत की, जहां न्यायपालिका की गरिमा और ईश्वरीय न्याय के अंतर्संबंधों पर गहन विमर्श हुआ।

समारोह के मुख्य वक्ता, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति बीडी राठी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए न्यायिक प्रक्रिया की संवेदनशीलता को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जब कोई व्यक्ति न्याय की आस में न्यायालय की चौखट पर खड़ा होता है, तो उसकी नजरों में अधिवक्ता और न्यायाधीश भगवान का स्वरूप होते हैं। अपनी विश्वसनीयता को अक्षुण्ण रखने के लिए न्यायिक पेशेवरों को शांत चित्त और सत्यनिष्ठ आचरण को अपनाना अनिवार्य है। न्यायमूर्ति राठी ने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि राजयोग ध्यान और ईश्वरीय प्रेरणा जीवन को सकारात्मकता से भर देती है, इसलिए दैनिक जीवन में इसका अभ्यास प्रत्येक अधिवक्ता के लिए आवश्यक है।





ब्रह्माकुमारीज संस्थान के महासचिव बीके करुणा भाई ने नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि लौकिक अदालतों में भले ही चातुर्य से तथ्यों को छिपाया जा सके, लेकिन ईश्वर की अदालत सर्वोपरि और पारदर्शी है। परमात्मा के न्याय में कुछ भी ओझल नहीं रहता, अतः हमें अपनी प्रत्येक क्रिया के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। वहीं, न्यायिक विंग की राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर बीके लता ने आत्मा की आंतरिक शक्ति पर बल देते हुए कहा कि सत्य और असत्य का निर्णय केवल दूसरों के लिए ही नहीं, बल्कि स्वयं के आत्मिक संतोष के लिए भी महत्वपूर्ण है। पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया केवल सुदृढ़ सोच और आत्मिक बल से ही संभव है।

इस विचार मंथन के दौरान उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता बीके रूप सिंह राठी, बालोतरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ओम प्रकाश दवे, देसूरी बार के अध्यक्ष मुकेश कुमार श्रीमाली, पिण्डवाड़ा के अध्यक्ष अमर सिंह, बाली के अध्यक्ष विजय चौधरी, तथा लायन एवं वरिष्ठ वकील अविनाश शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने एक सुर में स्वीकार किया कि आधुनिक न्यायिक प्रणाली में नैतिक मूल्यों का समावेश समय की मांग है। कार्यक्रम का कुशल संचालन बीके श्रद्धा ने किया और बीके प्रदीप ने उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया। समारोह के समापन पर सभी गणमान्य जनों को सम्मानित कर समाज में न्याय और शांति की स्थापना का संकल्प लिया गया।

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Pratahkal Bureau

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