आबू रोड। अध्यात्म और शांति की पावन धरा आबू रोड स्थित शांतिवन में आज एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जहाँ हजारों की संख्या में उमड़े जनसमूह ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के संस्थापक साकार ब्रह्मा बाबा की 57वीं पुण्यतिथि को 'विश्व शांति दिवस' के रूप में श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाया। मौन की गहरी लहरों और श्रद्धा के पुष्पों के बीच आयोजित इस गरिमामयी समारोह में वक्ताओं ने ब्रह्मा बाबा के उस क्रांतिकारी कदम को याद किया, जिसने समाज में नारी को 'शक्ति' के रूप में स्थापित कर विश्व कल्याण का नया मार्ग प्रशस्त किया।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में संस्थान की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी मुन्नी दीदी ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रह्मा बाबा का संपूर्ण जीवन नारी शक्ति के उत्थान को समर्पित था। उन्होंने उस कालखंड में महिलाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी जब समाज में उनकी भूमिका सीमित थी। आज उन्हीं के दिखाए मार्ग का अनुसरण कर हजारों माताएं और बहनें विश्व पटल पर आध्यात्मिक क्रांति की सूत्रधार बनी हैं। मुन्नी दीदी ने अपने बचपन के संस्मरणों को साझा करते हुए बताया कि कैसे बाबा के निस्वार्थ प्रेम और दिव्य पालना ने उन्हें समाज सेवा के प्रति संकल्पित किया, जिससे आज उनका जीवन श्रेष्ठता के शिखर की ओर अग्रसर है।





संस्थान की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके संतोष दीदी ने ब्रह्मा बाबा की दूरदर्शिता पर प्रकाश डालते हुए उन्हें एक ऐसा जौहरी बताया जो मनुष्य के भीतर छिपी ईश्वरीय क्षमताओं को पहचान लेते थे। उन्होंने कहा कि बाबा हर आने वाले व्यक्ति के भीतर भविष्य का 'विश्व सेवा का महान यंत्र' देखते थे, यही कारण था कि जो भी उनके संपर्क में आया, वह परमात्मा के मार्ग पर चलने के लिए स्वतः प्रेरित हो गया। इसी क्रम में संस्थान के महासचिव बीके करुणा भाई ने अपनी अनुभूतियों को साझा करते हुए कहा कि बाबा के सानिध्य में आते ही व्यक्ति को आत्म-बोध होने लगता था। उन्हें महसूस होता था कि बाबा उनके अंतर्मन की हर बात जानते हैं और यही प्रेरणा उन्हें दशकों से मानव कल्याण के पथ पर अडिग रखे हुए है।

कार्यक्रम में संस्थान के अतिरिक्त महासचिव बीके मृत्युंजय भाई सहित कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी ब्रह्मा बाबा के साथ बिताए अपने दिव्य अनुभवों को साझा किया, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। इस अवसर पर देश-विदेश से आए हजारों अनुयायियों ने कतारबद्ध होकर 'बाबा के कमरे' और 'शांति स्तंभ' पर मौन रहकर अपनी पुष्पांजलि अर्पित की और विश्व शांति की सामूहिक कामना की।

शांतिवन का पूरा परिसर आज फूलों की खुशबू और रूहानी तरंगों से सराबोर नजर आया। प्रकाश स्तंभ, शक्ति स्तंभ और तपस्या धाम को विशेष रूप से सजाया गया था। हजारों लोगों की उपस्थिति के बावजूद पूरे परिसर में एक अनूठा सन्नाटा व्याप्त था, जो 'आवाज की दुनिया से परे' की अनुभूति करा रहा था। यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं, बल्कि ब्रह्मा बाबा के उस महान कार्य के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक था जिसने मनुष्य को साधारण से महान बनने का मार्ग दिखाया।

Pratahkal Bureau

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