आबूरोड (सिरोही)। राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित आबूरोड का माधव विश्वविद्यालय परिसर इन दिनों केवल उच्च शिक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और अटूट सेवा परंपरा के लिए भी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहाँ स्थित हनुमान मंदिर आज एक ऐसा पावन केंद्र बन चुका है जहाँ पिछले 12 वर्षों से बिना रुके सेवा का महायज्ञ चल रहा है। प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाला यह विशाल भंडारा न केवल श्रद्धालुओं की भूख मिटा रहा है, बल्कि समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोकर सामाजिक समरसता की एक नई इबारत लिख रहा है।

इस सेवा संकल्प की नींव वर्ष 2013 में माधव विश्वविद्यालय के चेयरमैन एवं संस्थापक डॉ. राजकुमार राणा की दूरगामी सोच और प्रेरणा से रखी गई थी। डॉ. राणा का यह दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा की सार्थकता केवल डिग्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक शिक्षा वही है जो मनुष्य के भीतर सेवा और करुणा का भाव जागृत करे। इसी मानवीय दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में इस सेवा कार्य का शुभारंभ किया, जो आज एक अटूट परंपरा बन चुका है।

प्रत्येक मंगलवार की अलसुबह से ही हनुमान मंदिर परिसर में एक अलग ही उत्साह और आध्यात्मिकता का वातावरण दिखाई देने लगता है। क्या ग्रामीण, क्या श्रमिक, क्या विद्यार्थी और क्या राहगीर—बिना किसी जाति, धर्म या वर्ग के भेदभाव के हज़ारों लोग यहाँ मर्यादा और आदर के साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं। डॉ. राजकुमार राणा के कुशल निर्देशन में इस पूरी व्यवस्था को इतने व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जाता है कि स्वच्छता और अनुशासन यहाँ की पहचान बन गए हैं। विश्वविद्यालय परिवार के शिक्षक, कर्मचारी और स्वयंसेवक अपनी नियमित ड्यूटी से इतर यहाँ एक विनम्र सेवक की भूमिका में नज़र आते हैं, जो डॉ. राणा के 'सेवा परमो धर्म:' के सिद्धांत को जीवंत करते हैं।

स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह केवल भोजन का वितरण नहीं, बल्कि उनके संकट के समय का सहारा और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। डॉ. राजकुमार राणा स्वयं व्यक्तिगत रूप से इन व्यवस्थाओं की निगरानी करते हैं, ताकि सेवा की गुणवत्ता और पवित्रता में कभी कमी न आए। यह पहल आज के दौर में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) से कहीं ऊपर उठकर एक व्यक्तिगत और संस्थागत समर्पण की अनूठी मिसाल बन गई है। 12 वर्षों का यह निर्बाध सफर इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प नेक हो और नेतृत्व सेवाभावी, तो एक शिक्षण संस्थान भी समाज की दिशा बदलने वाला शक्ति केंद्र बन सकता है।

Pratahkal Newsroom

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