आबू पर्वत। अरावली की शांत और ऊँची चोटियों ने सोमवार की शाम एक ऐसा मंजर देखा, जिसने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय आबू पर्वत की पूर्व छात्र समिति द्वारा आयोजित "एक शाम शहीदों के नाम" कार्यक्रम ने जनमानस को राष्ट्रभक्ति के अनूठे सूत्र में पिरो दिया। शौर्य, संवेदना और समर्पण के इस त्रिवेणी संगम में जब देशभक्ति के तराने गूंजे, तो पूरा आबू पर्वत "भारत माता की जय" के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ भारतीय सेना और पुलिस के आला अधिकारी न केवल अतिथि के रूप में मौजूद थे, बल्कि वे स्वयं भी इस भावनात्मक प्रवाह का हिस्सा बने।

जैसे-जैसे शाम ढली, अरावली की गोद में स्थित आयोजन स्थल देशभक्ति की स्वर लहरियों से सराबोर हो गया। स्थानीय कलाकारों, स्कूली बच्चों और पूर्व छात्रों ने अपनी प्रस्तुतियों से शहीदों के बलिदान की गाथा को जीवंत कर दिया। जब नन्हे बच्चों ने मंच पर वीर रस की कविताएँ और नृत्य प्रस्तुत किए, तो पंडाल में मौजूद हर व्यक्ति की आँखें नम हो गईं। इस शाम का सबसे हृदयस्पर्शी क्षण वह था, जब देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सेना के जांबाज अधिकारियों ने स्वयं मंच संभाला। वर्दीधारी जवानों ने जब गीतों और कविताओं के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त कीं, तो पूरा वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह दृश्य सेना और नागरिक समाज के बीच के अटूट विश्वास और सम्मान का जीवंत प्रमाण था।

इस गरिमामय आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के पूर्व छात्रों ने अपनी मातृभूमि के प्रति कर्तव्य निभाते हुए देश-विदेश से आर्थिक सहयोग प्रदान किया। सामाजिक सरोकारों में अग्रणी रोटरी क्लब ऑफ अर्बुदांचल, लायंस क्लब आबू पर्वत और भारतीय स्टेट बैंक की आबू पर्वत शाखा ने भी इस पुनीत कार्य में अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। कृतज्ञता के प्रतीक स्वरूप कार्यक्रम में उपस्थित सभी सैनिकों को गुलाब का फूल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। मंच का कुशल और प्रभावी संचालन सुरेश थिंगर एवं अजय बंसल द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से दर्शकों को अंत तक बाँधे रखा।

कार्यक्रम के समापन पर पूर्व छात्र संघ के अध्यक्ष संजय सिंघल ने आयोजन को सफल बनाने वाले सभी सहयोगकर्ताओं, गणमान्य अतिथियों, मीडिया जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षकों और स्थानीय निवासियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि यह आयोजन मात्र एक सांस्कृतिक संध्या नहीं, बल्कि उन वीर बलिदानियों के प्रति हमारी सामूहिक श्रद्धांजलि है जिन्होंने राष्ट्र की वेदी पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। "एक शाम शहीदों के नाम" ने आबू पर्वत की फिजाओं में यह संदेश दृढ़ता से स्थापित कर दिया कि शहीदों का बलिदान अमर है और आने वाली पीढ़ियाँ उनके शौर्य से युगों-युगों तक प्रेरणा लेती रहेंगी।

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