माउंट आबू। अरावली की शांत वादियों में स्थित आध्यात्मिक मुख्यालय माउंट आबू आज एक अलौकिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया, जब प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की 57वीं पुण्यतिथि पर देश-विदेश से आए हजारों राजयोगियों का हुजूम उमड़ पड़ा। 18 जनवरी का यह दिन न केवल एक संस्मरण का अवसर था, बल्कि 'विश्व शांति दिवस' के रूप में एक वैश्विक संकल्प का प्रतीक बन गया। अलसुबह से ही समूचा परिसर 'शांति के मसीहा' को श्रद्धांजलि देने पहुंचे श्रद्धालुओं की कतारों से पट गया, जिससे आध्यात्मिक नगरी में आस्था का एक विराट समुद्र दिखाई दिया।

कार्यक्रम का आगाज ब्रह्ममुहूर्त में तड़के दो बजे से ही हो गया था। कड़ाके की ठंड के बावजूद राजयोगी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। ब्रह्मा बाबा के समाधि स्थल 'शांति स्तंभ' पर सामूहिक राजयोग अभ्यास के माध्यम से विश्व शांति, मानवीय एकता और राष्ट्र की सुख-समृद्धि के लिए शांति के शक्तिशाली प्रकंपन प्रवाहित किए गए। दिन भर चले साधना के इन दौरों ने उपस्थित जनसमूह को गहन आत्मिक शांति का अनुभव कराया। संस्था की तपस्यास्थली कुटिया, मेडिटेशन हॉल, ज्ञान सरोवर और आध्यात्मिक संग्रहालय जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा, जहाँ हर कोई बाबा की तपस्वी जीवन यात्रा को नमन करता नजर आया।

संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके शशिप्रभा ने इस पावन अवसर पर ब्रह्मा बाबा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने केवल वचनों से नहीं, बल्कि अपने आचरण और संपूर्ण पवित्रता से योग की सर्वोच्च अवस्था को प्राप्त कर दुनिया को निस्वार्थ सेवा का पाठ पढ़ाया। उन्होंने रेखांकित किया कि बाबा ने विकटतम परिस्थितियों में भी शांति की मशाल को जलाए रखा और आज उन्हीं के पदचिह्नों पर चलकर लाखों लोग अपना जीवन सफल बना रहे हैं। वहीं, संयुक्त मुख्य प्रशासिका सुदेश दीदी ने बाबा की दूरदृष्टि को नमन करते हुए कहा कि उनके द्वारा रोपा गया यह संगठन आज समाज के हर वर्ग को जोड़ने और मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका राजयोगिनी बीके शीलू दीदी सहित अन्य वक्ताओं ने भी ब्रह्मा बाबा के साथ बिताए संस्मरणों को साझा कर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। वक्ताओं ने आह्वान किया कि बाबा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि उनके बताए मार्ग और जीवन चरित्र को अपने आचरण में उतारना ही है। ग्लोबल अस्पताल से लेकर शांति वन तक, हर जगह अनुशासन और मौन की गहन लहर महसूस की गई। दिन ढलने तक श्रद्धालुओं का जमावड़ा बना रहा, जो इस बात का प्रमाण था कि ब्रह्मा बाबा की शिक्षाएं आज भी वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक हैं। यह आयोजन केवल एक पुण्यतिथि का कार्यक्रम न रहकर, विश्व परिवर्तन की दिशा में एक सशक्त आध्यात्मिक आंदोलन के रूप में संपन्न हुआ।

Sunil Acharya, Mount Abu

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सुनिल आचार्य माउंट आबू से जुड़े प्रमुख रिपोर्टर हैं, जो स्थानीय और राष्ट्रीय समाचारों की विश्वसनीय और सटीक कवरेज के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्रकारिता में तथ्यपरक रिपोर्टिंग और घटनाओं की गहन समीक्षा का विशेष योगदान है। सुनिल आचार्य हर खबर को निष्पक्ष दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं और पाठकों तक सही जानकारी पहुँचाने का पूरा प्रयास करते हैं। उनका लेखन शैली सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो पाठकों को समाचार के हर पहलू से अवगत कराता है।

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