श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा आदर्श नगर, सवाई माधोपुर के तत्वावधान में आयोजित पर्युषण महापर्व आराधना के चौथे दिन वाणी संयम दिवस मनाया गया। इस अवसर पर वाणी के संयम, उसके महत्व और जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव पर विचार रखे गए।

प्रातःकालीन सत्र में योग एवं प्रेक्षाध्यान से एक घंटे की प्रायोगिक अभ्यास साधना कराई गई, जो अभूतपूर्व रही। इसके बाद आयोजित प्रातःकालीन प्रवचन सभा में प्रवक्ता उपासक पारसमल दुगड़ ने वाणी संयम की उपादेयता बताते हुए कहा कि हमारी जीभ छोटी जरूर है, लेकिन इसका घाव बड़ा होता है, इसलिए संयमित वाणी जरूरी है।

उन्होंने आचार्य श्री तुलसी के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि बोलना मनुष्य का जन्मजात अधिकार है, पर तोलकर बोलना मनुष्य का धर्म है। जैन आगमों में वाणी के चार दोष बताए गए हैं। इनमें असत्य यानी झूठ बोलना, परुष यानी कठोर बोलना, पैशुन्य यानी चुगली करना और प्रलाप यानी बकवास या व्यर्थ बोलना शामिल हैं। वाणी संयम दिवस इन चारों दोषों से मुक्त होने का अभ्यास दिवस है।

आचार्य श्री महाश्रमण जी फरमाते हैं कि वाणी का संयम मन का संयम है। जो वाणी को संभाल लेता है, वह पूरे जीवन को संभाल लेता है। तेरापंथ के मर्यादा पत्र में साधु-साध्वियों के लिए भाषा समिति का विशेष विधान है। इसमें बिना सोचे न बोलना, हित, मित और प्रिय बोलना तथा कलहकारी और विकथा से बचना बताया गया है। श्रावकों के लिए भी यही शिक्षा है कि मौन श्रेष्ठ है, किंतु वाणी संयम सर्वश्रेष्ठ है।

प्रवक्ता ने कहा कि आज सोशल मीडिया का युग है और यहां उंगली भी वाणी बन गई है। मोबाइल पर भेजा गया एक संदेश रिश्ता तोड़ सकता है। एक टिप्पणी से हजारों-लाखों दिल दुखी हो सकते हैं और एक अफवाह से समाज में आग लग सकती है। ऐसे समय में वाणी संयम दिवस का महत्व और बढ़ जाता है। यह दिवस सिखाता है कि क्या बोलना है—सत्य, प्रिय और हितकारी; कब बोलना है—आवश्यकता होने पर; कैसे बोलना है—मधुरता और विनय से; और कितना बोलना है—कम और काम का।

सहयोगी उपासक रमेश कुमार सिंघवी ने इस अवसर पर बताया कि असत्य और कठोर वाणी से पाप कर्म का बंध होता है, जबकि संयम से निर्जरा होती है। संयमित वाणी से परिवार और समाज में प्रेम बढ़ता है। कम बोलने वाले के मन में कम विकल्प और अधिक शांति रहती है। मीठा बोलने वाला सबका प्रिय बनता है और धर्म की प्रभावना करता है।

उन्होंने वाणी संयम दिवस पर तीन संकल्प लेने का आह्वान किया। इनमें वाणी संयम के लिए नियमित मौन साधना करना, किसी की निंदा, चुगली और झूठ नहीं बोलना तथा ऐसी वाणी से बचना शामिल है, जिससे हिंसा, द्वेषभाव और असंयम को बढ़ावा मिले।

इस अवसर पर उपासक द्वय द्वारा प्रेरक वाणी संयम गीतिका की मधुर प्रस्तुति दी गई।

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur

नाम: हरक चंद जैन

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)

परिचय

हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:

  • दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
  • अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।

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