वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान: सवाई माधोपुर में कार्यक्रम शुरू
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मलारना चौड़ में दुर्गा सागर तालाब पर जल पूजन कर प्राकृतिक खेती और जल संचयन को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

सवाई माधोपुर के मलारना चौड़ में आयोजित वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान कार्यक्रम के दौरान दुर्गा सागर तालाब पर पारंपरिक रीति-रिवाज से जल पूजन करते मुख्य अतिथि कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और अन्य उपस्थित जनप्रतिनिधि।
राज्य सरकार द्वारा जल स्रोतों के पुनरुद्धार और पर्यावरण संवर्धन के संकल्प के साथ संचालित “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026” के अंतर्गत सोमवार को सवाई माधोपुर जिले में एक बड़े जन आंदोलन की नींव रखी गई। कृषि विभाग की ओर से पंचायत समिति मलारना डूंगर के ग्राम मलारना चौड़ में तेजाजी मंदिर परिसर स्थित दुर्गा सागर तालाब पर जिला स्तरीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने शिरकत की। कृषि मंत्री ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और प्राकृतिक खेती को महज एक सरकारी योजना न मानकर इसे प्रत्येक नागरिक का व्यक्तिगत दायित्व और एक व्यापक जन आंदोलन बनाने का पुरजोर आह्वान किया।
जिला स्तरीय इस भव्य कार्यक्रम का आधिकारिक शुभारंभ अत्यंत गरिमामयी और पारंपरिक माहौल में “वंदे गंगा” कलश यात्रा के साथ हुआ। मंगल कलश धारण किए महिलाओं और ग्रामीणों की सहभागिता के बीच कार्यक्रम स्थल पर उत्साह का संचार हुआ। इसके पश्चात मुख्य अतिथि डॉ. किरोड़ी लाल मीणा एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा वैदिक रीति से जल पूजन, पीपल पूजन तथा व्यापक स्तर पर पौधारोपण कार्यक्रम संपन्न किया गया। इस संवेदनशील और पर्यावरण-अनुकूल पहल के दौरान कार्यक्रम में उपस्थित तमाम जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, किसानों, विद्यार्थियों और आम जनता ने जल स्रोतों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) तथा पर्यावरण की सुरक्षा के लिए समर्पित रहने का सामूहिक संकल्प लिया।
समारोह को जन-जन तक पहुंचाने और संदेश को प्रभावी बनाने के लिए लोक संस्कृति का बेहतरीन समावेश देखा गया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित पद दंगल और लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। स्थानीय लोक कलाकारों ने अपने पारंपरिक लोकगीतों और सांस्कृतिक कलाकृतियों के जरिए ग्रामीणों को जल संरक्षण और पौधारोपण के प्रति जागरूक किया। इसके साथ ही कलाकारों ने सरकार की तारबंदी योजना, किसान सम्मान निधि एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की बारीकियों को अत्यंत सरल और संगीतमय ढंग से आमजन के सामने प्रस्तुत किया, जिसने लोगों को पर्यावरण संरक्षण तथा पानी की हर एक बूंद को बचाने का कड़ा संदेश दिया।
इस जिला स्तरीय आयोजन का सबसे प्रमुख और विशेष आकर्षण खरीफ बुआई पूर्व कृषक संगोष्ठी एवं कृषि नवाचार प्रदर्शनी रही। खरीफ सीजन की शुरुआत से ठीक पहले आयोजित इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों तथा विभागीय विशेषज्ञों ने उपस्थित किसानों से सीधा संवाद किया। विशेषज्ञों ने किसानों को खरीफ फसलों की बुआई से पूर्व की जाने वाली आवश्यक तैयारियों, क्षेत्र के अनुकूल उचित फसल चयन, सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों, प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन (मिट्टी की जांच और देखरेख) तथा नवीनतम उन्नत कृषि तकनीकों के बारे में विस्तार से तकनीकी जानकारी प्रदान की। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों की सभी प्रकार की शंकाओं और जिज्ञासाओं का मौके पर ही व्यावहारिक समाधान किया गया। विशेषज्ञों ने कृषकों को कम से कम लागत में वैज्ञानिक और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने तथा एक टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने के संबंध में बेहद महत्वपूर्ण मार्गदर्शन भी प्रदान किया।
इसी क्रम में आयोजित कृषि नवाचार प्रदर्शनी में आधुनिक कृषि पद्धतियों, अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों और नए नवाचारों को प्रदर्शित किया गया, जो किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही। इस प्रदर्शनी में प्रगतिशील किसानों द्वारा स्वयं तैयार की गई जैविक फलों एवं कृषि उत्पादों की एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका अतिथियों ने अवलोकन कर सराहना की। कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाने के लिए मंच पर और पंडाल में पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर, संयुक्त निदेशक कृषि लखपत लाल मीणा, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी शैलेंद्र सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश चंद्र जैन सहित विभिन्न संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा अत्यंत भारी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। इस विशाल जनसमुदाय, युवाओं और कृषकों की सक्रिय सहभागिता ने यह साबित कर दिया कि आने वाले समय में वंदे गंगा अभियान सवाई माधोपुर जिले में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक युगांतरकारी मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।

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