गंगापुर सिटी में सवर्ण समाज का शंखनाद: UGC के नए 'काले कानून' के खिलाफ सीताराम मंदिर में जुटेगी भारी भीड़
गंगापुर सिटी में 25 जनवरी को सवर्ण समाज की बड़ी बैठक! यूजीसी (UGC) के प्रस्तावित कानून के विरोध में सीताराम मंदिर में सवर्ण समाज संघर्ष समिति बनाएगी आंदोलन की रणनीति। दीपक नरुका, महेंद्र गर्ग और हेमेंद्र बोहरा ने युवाओं और महिलाओं से भारी संख्या में जुटने का आह्वान किया है। जानें क्या है पूरा मामला।

गंगापुर सिटी। राजस्थान के हृदय स्थल गंगापुर सिटी में एक बार फिर सामाजिक चेतना और अधिकारों की रक्षा के लिए बिगुल फूँक दिया गया है। भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित नए यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) कानून को लेकर सवर्ण समाज के भीतर आक्रोश की ज्वाला धधक रही है। इस प्रस्तावित कानून के कुछ विवादित प्रावधानों को सवर्ण समाज के हितों पर सीधा प्रहार मानते हुए, सवर्ण समाज संघर्ष समिति ने एक निर्णायक युद्ध की घोषणा कर दी है।
आगामी 25 जनवरी: संघर्ष की नई इबारत
आगामी 25 जनवरी (रविवार) को दोपहर 2:30 बजे शहर की ऐतिहासिक पुरानी अनाज मंडी स्थित सीताराम मंदिर में सवर्ण समाज का एक विशाल महासंगम आयोजित होने जा रहा है। यह मात्र एक बैठक नहीं, बल्कि समाज के बच्चों और युवाओं के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए रणनीति तैयार करने का एक बड़ा मंच होगा। समिति ने स्पष्ट किया है कि यूजीसी के नए नियम सवर्ण समाज के शैक्षिक और सामाजिक हितों के प्रतिकूल हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
एकजुटता की पुकार: सवर्ण समाज संघर्ष समिति का आह्वान
समिति के प्रमुख सदस्य दीपक नरुका, महेंद्र गर्ग और हेमेंद्र बोहरा ने संयुक्त रूप से समाज के हर वर्ग—चाहे वे युवा हों, महिलाएँ हों या अनुभवी बुजुर्ग—से इस बैठक में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि यह समय अपनी ताकत दिखाने और एकजुट होने का है। समाज के सभी संगठनों के अध्यक्ष, महामंत्री और समस्त पदाधिकारियों को इस बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के लिए आमंत्रित किया गया है, ताकि 'यूजीसी कानून' के खिलाफ एक सशक्त और देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा गंगापुर सिटी की इस पावन धरा से तैयार की जा सके।
भविष्य की रक्षा का संकल्प
बैठक का मुख्य एजेंडा प्रस्तावित कानून की कानूनी खामियों और उसके दूरगामी दुष्प्रभावों पर चर्चा करना है। सवर्ण समाज का आरोप है कि इस नए कानून के माध्यम से उनके अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है। "सवर्ण समाज एकता जिंदाबाद" के गगनभेदी नारों के साथ, समिति ने यह संकल्प लिया है कि जब तक सरकार इन छात्र-विरोधी प्रावधानों पर पुनर्विचार नहीं करती, आंदोलन थमेगा नहीं। 25 जनवरी की यह बैठक सवर्ण आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

Pratahkal Bureau
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