यूजीसी रेगुलेशन एक्ट के विरोध में सवर्ण समाज की बैठक, 1 फरवरी को हिंडौन बंद
हिंडौन सिटी में सवर्ण समाज संघर्ष समिति ने यूजीसी के नए अधिनियमों को भेदभावपूर्ण बताते हुए बाजार बंद करने और आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।

हिंडौन सिटी की पत्थर वालों की धर्मशाला में यूजीसी रेगुलेशन एक्ट के खिलाफ रणनीति बनाते सवर्ण समाज संघर्ष समिति के पदाधिकारी और विभिन्न समाजों के अध्यक्ष।
हिंडौन सिटी के स्टेशन रोड स्थित पत्थर वालों की धर्मशाला में सवर्ण समाज संघर्ष समिति की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए यूजीसी रेगुलेशन एक्ट के नए अधिनियमों के विरोध में हुई। इसमें सवर्ण समाज के विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारी, व्यापारी और बड़ी संख्या में सर्व समाज के लोग शामिल हुए।
आंदोलन का आह्वान और रणनीति
बैठक में ब्राह्मण समाज के तहसील अध्यक्ष अशोक शर्मा, राजपूत समाज के जिलाध्यक्ष रामराज सिंह एवं अग्रवाल समाज के अध्यक्ष सत्येंद्र आर्य ने जानकारी दी कि:
- यूजीसी के नए अधिनियमों के विरोध में 1 फरवरी को हिंडौन में बाजार बंद का आह्वान किया गया है।
- सवर्ण समाज शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से आंदोलन करेगा।
- जब तक अधिनियम वापस नहीं लिए जाते, तब तक संघर्ष समिति आंदोलनरत रहेगी।
- स्थानीय स्तर पर विशेष कमेटी का गठन किया जाएगा।
प्रमुख वक्ताओं के विचार और चिंताएं
बैठक के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं:
- अशोक शर्मा: "यूजीसी के नए अधिनियमों में सवर्ण समाज के विद्यार्थियों के संरक्षण के लिए कोई ठोस प्रावधान या समिति का गठन नहीं किया गया है।"
- वेदप्रकाश शर्मा: "समाज को एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना होगा।"
- मंजीत मुदगल: "इन अधिनियमों से सामाजिक वैमनस्यता को बढ़ावा मिल रहा है।"
- रामराज सिंह: "नए नियमों से सवर्ण समाज की भावी पीढ़ी हताश है।"
यूजीसी की नई गाइडलाइन और विवाद का कारण
शिक्षाविद् अशोक शर्मा ने बताया कि 13 जनवरी को यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव रोकने के उद्देश्य से नई गाइडलाइन जारी की।
- नियम: सभी सरकारी और निजी कॉलेजों में इक्विटी कमेटी (समता समिति) बनाना अनिवार्य है।
- समिति का स्वरूप: इसमें ओबीसी, अनुसूचित जाति-जनजाति, दिव्यांग और महिलाओं का प्रतिनिधित्व होगा, जो भेदभाव की शिकायतों की जांच करेगी।
- तर्क: यूजीसी के अनुसार इससे कमजोर वर्गों को न्याय मिलेगा।
- आशंका: विरोधियों का कहना है कि यह व्यवस्था सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ दुरुपयोग का जरिया बन सकती है। झूठी शिकायतों से छात्रों का करियर प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

Pratahkal Bureau
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