यूजीसी कानून 2026 के विरोध में सवर्ण समाज ने गंगापुर सिटी में निकाली रैली
सवर्ण समाज संघर्ष समिति ने यूजीसी के नए प्रावधानों को भेदभावपूर्ण बताते हुए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

गंगापुर सिटी में बुधवार को यूजीसी कानून 2026 के विरोध में एकत्रित सवर्ण समाज के लोग और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि मिनी सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए।
गंगापुर सिटी, मदन मोहन गर्ग। केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी काला कानून 2026 लागू करने पर देश के सवर्ण समाज में विद्रोह और असंतोष का ज्वार उठने लगा है। गंगापुर सिटी क्षेत्र सामान्य वर्ग के गणमान्य लोग, व्यापारी और विभिन्न संगठन बुधवार को पुरानी अनाज मंडी सीताराम मंदिर परिसर में प्रातः 10:30 बजे एकत्रित हुए और यूजीसी कानून लागू करने का पुरजोर विरोध किया।
विरोध का मुख्य कारण और वक्ताओं के विचार
विभिन्न व्यापारिक एवं सामाजिक संगठनों के वक्ताओं ने कहा कि:
- "उक्त कानून में एससी एसटी ओबीसी आदि छात्रों द्वारा सामान्य वर्ग छात्रों के खिलाफ और उनके भविष्य को अंधकार में करने का प्रावधान रखा है ऐसे में इस काले कानून को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए।"
- वर्तमान यूजीसी कानून अधिनियम सवर्ण समाज के लिए अभिशाप है। वर्ष 2012 के नियमों में यह कानून संतुलित बनाया था लेकिन वर्ष 2026 में यह कानून सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य और जीवन को तबाह करने वाला बनाया गया है।
मिनी सचिवालय तक रैली और नारेबाजी
पुरानी अनाज मंडी सीताराम मंदिर से सवर्ण समाज के गणमान्य सैकड़ों बंधु रैली के रूप में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मिनी सचिवालय पहुंचे। रैली में "केंद्र सरकार होश में आओ, यूजीसी एक्ट वापस लो" आदि नारे लगाए गए। वहां पहुंचकर अतिरिक्त जिला कलेक्टर एवं उप जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में उठाई गई गंभीर चिंताएं
ज्ञापन में बताया गया कि:
- "कानून में एससी एसटी ओबीसी के छात्रों द्वारा सामान्य वर्ग के छात्रों पर झूठी शिकायत दर्ज कराए जाने पर भी कार्यवाही की जावेगी जबकि झूठी शिकायतकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।"
- ऐसे में सामान्य वर्ग के सवर्ण समाज के छात्रों को प्रताड़ित किया जावेगा जिससे वह मजबूर होकर या तो शिक्षा को छोड़ देंगे या आत्महत्या करने पर मजबूर होंगे।
- शैक्षणिक संस्थान समाज की जड़ है जिसका उद्देश्य समानता, समावेश और एकता को मजबूत करना है ना की विभाजन। ऐसे में इस कानून को शीघ्र प्रभाव से वापस लिया जावे।
- यूजीसी कानून को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए अन्यथा सामान्य वर्ग समाज को उत्पीड़न किया गया तो उग्र आंदोलन की ओर अग्रसर होना पड़ेगा।
रैली में सम्मिलित गणमान्य नागरिक और पदाधिकारी
इस मौके पर विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, व्यापार मंडल के सदस्य और शिक्षित वर्ग के सैकड़ों लोग शामिल हुए: दीपक नरुका, गोविंद प्रसाद बरनाला, महेंद्र गर्ग, शैलेंद्र शर्मा, अनिल दुबे एडवोकेट, महेश पाल जादोन, परसोत्तम पत्रकार, अरविंद गोयल, वेद प्रकाश मंगल, दीनदयाल मच्छीपुरा, संजय गोयल, चंद्र मोहन पाराशर, निर्मल कुमार शर्मा, सुरेंद्र मित्तल, दिलीप तिवारी, विवेक पाठक, महावीर सिंह राजपूत, रामचरण, मिथिलेश शर्मा, मोहनलाल कुनकटा, लक्ष्मी चंद महोली, शैलेंद्र शर्मा, देवेंद्र शर्मा, शंभू दयाल, गोपाल दीक्षित, बाबूलाल व्याख्याता, महेश सर्वेयर, संजय आर्य, राजेश शर्मा, रामस्वरूप शर्मा, कृष्ण कुमार मेडिकल, गोपाल सेवा, ओम प्रकाश, जितेंद्र शर्मा, जितेंद्र नरूका, राजेंद्र नरूका, हेमेंद्र बोहरा, देवेंद्र पाठक, देवेंद्र शर्मा, वेद प्रकाश शर्मा, मुकेश गुप्ता, बाबूलाल शर्मा, विकास शुक्ला, राधा मोहन शर्मा, अशोक मंगल, राम अवतार, रमेश चंद जीवद आदि।
आगामी रणनीति और बैठक की सूचना
सवर्ण समाज संघर्ष समिति गंगापुर सिटी की आगामी बैठक इस काले कानून को वापस लेने के लिए दिनांक 30 जनवरी शुक्रवार को दोपहर 2 बजे श्री सीताराम जी मंदिर पुरानी अनाज मंडी गंगापुर सिटी में होगी। जिसमें सभी सवर्ण समाज के व्यापारिक संगठनों, छात्रों, युवाओं, महिलाओं, सवर्ण समाज के सभी संगठनों को आमंत्रित कर आगामी कार्रवाई पर विचार होगा।

Pratahkal Bureau
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