टोंक: मकर संक्रांति पर सूर्य का राशि परिवर्तन, बाघ की सवारी पर आ रहीं संक्रांति खोलेंगी खुशहाली के द्वार
टोंक में मनु ज्योतिष संस्थान के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि 14 जनवरी को सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा। बाघ की सवारी पर आ रही यह मंदाकिनी संक्रांति प्रशासन और शासन वर्ग के लिए शुभ रहेगी, जबकि आमजन के लिए मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होगा। जानिए राशियों पर प्रभाव, दान का शुभ मुहूर्त और संक्रांति के विशेष स्वरूप के बारे में इस विस्तृत रिपोर्ट में।

टोंक। सनातन धर्म की गणनाओं और खगोलीय संचरण के अनुसार इस वर्ष सूर्य देव अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश कर जनमानस के लिए शुभ कार्यों के द्वार खोलने जा रहे हैं। मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री के अनुसार, माघ मास की कृष्णपक्ष एकादशी तिथि, 14 जनवरी बुधवार को दोपहर 15.05 बजे सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा। इस महापर्व के साथ ही एक माह से चला आ रहा मलमास समाप्त हो जाएगा और मांगलिक कार्यों की गूंज पुनः सुनाई देने लगेगी। ग्रहों की विशेष स्थिति को देखें तो इस अवधि में चंद्र देव अनुराधा नक्षत्र और वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे, जबकि नक्षत्र स्वामी शनि, राशि स्वामी मंगल और वार स्वामी बुध की युति इस संक्रांति को ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बना रही है।
बाबूलाल शास्त्री ने संक्रांति के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस वर्ष संक्रांति का वाहन बाघ और उपवाहन घोड़ा है। मंदाकिनी नाम की यह संक्रांति विशेषकर शासन-सत्ता और प्रशासन से जुड़े लोगों के लिए उन्नति के नए मार्ग प्रशस्त करेगी। सरकारी अधिकारियों, न्यायाधीशों, सेना नायकों और मंत्रियों के लिए यह समय शुभ फलदायक सिद्ध होगा, जिससे देश के विकास और जन-कल्याण की नई योजनाओं का लाभ सीधे आमजन तक पहुँचेगा। हालांकि, दिन के तीसरे पहर की याम व्यापिनी होने के कारण यह उद्योगपतियों और व्यापारिक वर्ग के लिए मध्यम फलदायी रहने के संकेत दे रही है। संक्रांति का गमन पश्चिम दिशा की ओर है और इसकी दृष्टि वायव्य कोण पर रहेगी, जिसके चलते पंजाब, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में कुछ कष्टप्रद स्थितियां बन सकती हैं।
संक्रांति के अलौकिक स्वरूप का वर्णन करते हुए निदेशक ने बताया कि बालव करण की यह संक्रांति पीले वस्त्रों में सुसज्जित है, जो हाथों में गदा धारण किए हुए और शरीर पर कुमकुम का लेपन किए हुए है। भूत जाति की इस संक्रांति के हाथ में चमेली का पुष्प शोभायमान है। आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो यह किराना, घी, मसाले, गुड़ और चीनी जैसी वस्तुओं के भावों में वृद्धि का कारक बनेगी, जबकि स्वर्ण और पीले वस्त्रों की कीमतों में भी तेजी देखी जा सकती है। राशियों पर इसके प्रभाव की चर्चा करते हुए शास्त्री जी ने स्पष्ट किया कि मिथुन, वृश्चिक और मकर राशि के जातकों के लिए यह समय अत्यंत शुभ रहेगा, वहीं कर्क, तुला और मीन राशि वालों को विशेष लाभ प्राप्त होगा। वृष, कन्या और कुंभ राशि के लिए फल मध्यम रहेंगे, जबकि मेष, सिंह और धनु राशि के जातकों को विशेष सावधानी और दान-पुण्य की आवश्यकता होगी।
दान और पुण्य के इस महापर्व पर सुबह 08.40 बजे से सूर्यास्त तक का समय विशेष महत्व रखेगा। इस पावन काल में गरीबों को भोजन और वस्त्रों का दान करना दोष निवारण के लिए उत्तम माना गया है। श्रद्धालु इस दिन तिल, गुड़, हरे चने, तांबे के बर्तन, सप्त धान्य और गौ दान के माध्यम से पुण्य अर्जित कर सकते हैं। भगवान सूर्य नारायण को जल मिश्रित दूध का अर्घ्य देना और आदित्य हृदय स्रोत का पाठ करना जीवन में सकारात्मकता और आरोग्य लेकर आएगा। मकर संक्रांति का यह पर्व न केवल ऋतु परिवर्तन का संदेश है, बल्कि यह श्रद्धा और समर्पण के जरिए जीवन में नए प्रकाश के आगमन का प्रतीक भी है।

Pratahkal Bureau
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