साध्वीश्री लक्ष्यप्रभाजी के विहार में उमड़ा तेरापंथ जन समुदाय तेरापंथ भवन आदर्शनगर में चातुर्मास सम्पन्न कर राजनगर पहुंची साध्वीवृन्द
तेरापंथ भवन आदर्शनगर में चातुर्मास पूर्ण कर साध्वीश्री लक्ष्यप्रभाजी आदि ठाणा-3 ने राजनगर की ओर भव्य विहार किया। श्रावक-श्राविकाओं के जयघोषों और पुष्पवृष्टि के बीच हुआ यह विहार तेरापंथ समाज की आस्था और अनुशासन का जीवंत उदाहरण बना। साध्वीश्री ने अंतिम प्रवचन में हितकारी वचनों के महत्व पर प्रकाश डाला।

आदर्शनगर, 6 नवंबर 2025।
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री लक्ष्यप्रभाजी आदि ठाणा-3 ने आदर्शनगर स्थित तेरापंथ भवन में चातुर्मास प्रवास पूर्ण कर बुधवार को भव्यता और अनुशासन से परिपूर्ण विहार यात्रा के साथ राजनगर कॉलोनी की ओर प्रस्थान किया। भोर की शांति में जब साध्वीश्रीजी ने बृहद मंगल पाठ के माध्यम से श्रावक-श्राविकाओं को आशीष प्रदान किया, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिकता और श्रद्धा से सराबोर हो उठा।
घड़ी की सुइयों ने जैसे ही 7:35 का समय दर्शाया, साध्वीवृन्द ने पदविहार प्रारंभ किया। उनके विहार के साथ श्रावक समाज जयघोष करता हुआ, अनुशासित पंक्तियों में पैदल चलते हुए श्रद्धाभाव से आगे बढ़ता गया। मार्ग पर पुष्पवृष्टि और जयमंगल के स्वर मिलकर एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे। राजनगर पहुंचने पर तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष मंजु जैन एवं अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने साध्वीवृन्द का हार्दिक स्वागत किया।
साध्वीश्री लक्ष्यप्रभाजी अब सवाई माधोपुर क्षेत्र में प्रवासरत तेरापंथी परिवारों के बीच धर्मप्रवर्तन कार्य करेंगी और आगामी जनवरी मास में आचार्यश्री महाश्रमणजी की सन्निधि में उपस्थित होंगी।
विहार से पूर्व साध्वीश्री ने तेरापंथ भवन आदर्शनगर में अंतिम प्रवचन के रूप में ‘प्रदेशी राजा और केशी श्रमण’ आख्यान की प्रेरणादायक प्रस्तुति दी। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि प्रिय वचन सभी को मधुर लगते हैं, परंतु हितकारी वचन कभी-कभी कटु भी प्रतीत हो सकते हैं। जिस प्रकार चिकित्सक अपने रोगी को हितकारी औषधि देता है, चाहे वह उसे अप्रिय लगे, उसी प्रकार सद्गुरु अपने अनुयायियों को हितकारी वचन प्रदान करते हैं, जो उनके आध्यात्मिक कल्याण के मार्ग को प्रकाशित करते हैं।
साध्वीश्री नव्यप्रभाजी और उन्नतप्रभाजी ने काव्य माध्यम से प्रेरणादायी प्रस्तुति देकर वातावरण को भावनात्मक बना दिया। इस अवसर पर उपासिका ललिता जैन, कन्या मंडल की आयुषी जैन, धर्मनिष्ठ युवा पुलकित जैन, उनकी सहधर्मिणी प्रशिक्षिका रश्मि जैन, तपसाधिका सुरेखा जैन, सभा एवं अणुव्रत समिति के पूर्व अध्यक्ष प्रकाशचंद जैन, सुश्रावक पांथूलाल जैन, अनिल जैन वर्धमान और सभा के मंत्री नरेन्द्र जैन ने अपनी भावाभिव्यक्तियाँ प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम का कुशल संचालन पूर्व प्रधानाचार्य उपासक चन्द्रप्रकाश जैन ने किया।
तेरापंथ भवन से राजनगर तक का यह विहार न केवल अनुशासन और भक्ति का प्रतीक बना, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरक संदेश भी छोड़ गया—आस्था, अनुशासन और आत्मकल्याण के पथ पर संगठित रूप से आगे बढ़ने का।
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