सवाई माधोपुर की मिठास छुएगी आसमान: पहली बार आयोजित होगा भव्य 'अमरूद महोत्सव', सजेंगी 200 स्टॉल्स और उमड़ेंगे हजारों किसान
सवाई माधोपुर के 263वें स्थापना दिवस पर 18-19 जनवरी 2026 को आयोजित होगा भव्य 'अमरूद महोत्सव'। डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के मार्गदर्शन में आयोजित इस मेले में 200 स्टॉल्स, 30 किस्में और हजारों किसान शामिल होंगे। जानें फल-फूल प्रतियोगिता, आधुनिक कृषि तकनीक और अमरूद को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की इस बड़ी पहल के बारे में पूरी जानकारी।

सवाई माधोपुर, 14 जनवरी। रणथंभौर की ऐतिहासिक वादियों और बाघों की दहाड़ के लिए प्रसिद्ध सवाई माधोपुर अब अपनी धरती के 'हरे सोने' यानी अमरूद की मिठास से पूरी दुनिया को सराबोर करने जा रहा है। जिले के 263वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 'पंच गौरव' अभियान के तहत एक ऐतिहासिक पहल की जा रही है। आगामी 18 और 19 जनवरी 2026 को स्थानीय दशहरा मैदान में जिले के पहले भव्य 'अमरूद महोत्सव एवं उन्नत कृषि तकनीकी मेला' का आयोजन होने जा रहा है। कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित होने वाला यह महोत्सव न केवल किसानों के लिए तकनीक का द्वार खोलेगा, बल्कि सवाई माधोपुर के अमरूद को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
जिला कलक्टर काना राम के नेतृत्व में प्रशासन ने इस दो दिवसीय आयोजन को लेकर कमर कस ली है। महोत्सव के केंद्र में लगभग 200 स्टॉल्स होंगी, जहाँ अमरूद की प्रदर्शनी के साथ-साथ कृषि यंत्रीकरण, ऑटोमेशन, उद्यानिकी तकनीक और समन्वित खेती का सजीव प्रदर्शन किया जाएगा। इस आयोजन की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें टोंक, जयपुर, कोटा, बूंदी, भीलवाड़ा, दौसा और करौली जैसे पड़ोसी जिलों से प्रतिदिन 10 हजार से अधिक किसानों के आने की संभावना है। यह संगम केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यहाँ किसान, वैज्ञानिक और व्यापारी एक ही मंच पर नजर आएंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सकेगा।
महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण 18 जनवरी को आयोजित होने वाली फल-फूल प्रदर्शनी होगी। उप निदेशक कृषि अमर सिंह के अनुसार, इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए किसानों को 16 जनवरी तक अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य है। निर्णायक समिति 12 विशिष्ट किस्मों के आधार पर सर्वश्रेष्ठ फल चुनने वाली है, जिसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पाने वालों को नकद पुरस्कार व प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। इस प्रतियोगिता की बागडोर कृषि अधिकारी देवेन्द्र मीना और डॉ. ताराचन्द महावर संभाल रहे हैं। वहीं, उप निदेशक फूल उत्कृष्टता केन्द्र लखपत लाल मीना ने बताया कि महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों की 20 से अधिक नर्सरियां भाग लेंगी, जहाँ अमरूद की करीब 30 किस्मों के पौधे उपलब्ध होंगे। नर्सरियों के बीच भी प्रतिस्पर्धा होगी, जिसमें सर्वश्रेष्ठ नर्सरी को 11 हजार रुपये तक का पुरस्कार दिया जाएगा।
सहायक कृषि अधिकारी पिन्टूलाल मीना ने महोत्सव के एक और दिलचस्प पहलू 'वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स' पर प्रकाश डाला। यहाँ अमरूद से बनी बर्फी, पल्प, स्कवेश, हलवा, लड्डू, चटनी और पाउडर जैसे उत्पादों का प्रदर्शन होगा। लुधियाना, लखनऊ, हरियाणा और दिल्ली के प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिक किसानों को प्रसंस्करण और पैकेजिंग के गुर सिखाएंगे। सहायक निदेशक उद्यान बृजेश मीना के अनुसार, आधुनिक खेती की दिशा में ड्रोन डेमो, स्मार्ट फार्मिंग और जैविक खेती जैसे स्टॉल्स किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगे। सर्वश्रेष्ठ स्टॉल प्रदर्शन के लिए भी आकर्षक पुरस्कार रखे गए हैं।
सहायक कृषि अधिकारी विजय जैन ने बताया कि किसानों और विशेषज्ञों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के लिए 'कृषक-वैज्ञानिक संवाद' और 'पशुपालक चौपाल' का आयोजन किया जाएगा। वर्तमान में सवाई माधोपुर में 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अमरूद की खेती होती है, जिससे सालाना 6 से 7 अरब रुपये का व्यापार होता है। इस महोत्सव के जरिए राज्य सरकार का उद्देश्य इस स्थानीय फल को वैश्विक ब्रांड बनाना है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियों के साथ यह महोत्सव न केवल एक व्यापारिक आयोजन, बल्कि सवाई माधोपुर की गौरवशाली संस्कृति और समृद्धि का एक उत्सव बनकर उभरेगा, जो भविष्य में जिले की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है।

Pratahkal Bureau
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